प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नवकार महामंत्र दिवस’ कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नवकार महामंत्र सिर्फ मंत्र नहीं है, ये हमारी आस्था का केंद्र है, हमारे जीवन का मूल स्वर... और इसका महत्व सिर्फ आध्यात्मिक नहीं है.
क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने कहा कि ये स्वयं से लेकर समाज तक सबको राह दिखाता है, जन से जग तक की यात्रा है. इस मंत्र का प्रत्येक पद ही नहीं, बल्कि प्रत्येक अक्षर अपने आप में मंत्र है. नवकार महामंत्र कहता है कि स्वयं पर विश्वास करो, स्वयं की यात्रा शुरू करो, दुश्मन बाहर नहीं है, दुश्मन भीतर है. नकारात्मक सोच, अविश्वास, वैमनस्य, स्वार्थ ही वो शत्रु हैं, जिन्हें जीतना ही असली विजय है. यही कारण है कि जैन धर्म हमें बाहरी दुनिया नहीं, बल्कि खुद को जीतने की प्रेरणा देता है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम जानते हैं कि जीवन के 9 तत्व हैं. ये 9 तत्व जीवन को पूर्णता की ओर ले जाते हैं, इसलिए हमारी संस्कृति में नव का विशेष महत्व है. नवकार महामंत्र का ये दर्शन विकसित भारत के विजन से जुड़ता है. मैंने लालकिले से कहा है - विकसित भारत यानी विकास भी, विरासत भी. एक ऐसा भारत जो रुकेगा नहीं, ऐसा भारत जो थमेगा नहीं. जो ऊंचाई छुएगा, लेकिन अपनी जड़ों से नहीं कटेगा.
20 से ज्यादा तीर्थंकरों की मूर्तियां विदेश से वापस आईं
पीएम मोदी ने आगे कहा कि विकसित भारत अपनी संस्कृति पर करेगा. इसलिए हम अपने तीर्थंकरों की शिक्षाओं को सहेजते हैं. जब भगवान महावीर के 2550वें निर्वाण महोत्सव का समय आया तो हमने देश भर में उसे मनाया. आज जब प्राचीन मूर्तियां विदेश से वापस आती हैं, तो उसमें हमारे तीर्थंकर की प्रतिमाएं भी लौटती हैं. आपको जानकर गर्व होगा कि बीते वर्षों में 20 से ज्यादा तीर्थंकरों की मूर्तियां विदेश से वापस आई हैं. जैन धर्म का साहित्य भारत के बौद्धिक वैभव की रीढ़ है. इस ज्ञान को संजोना हमारा कर्तव्य है. इसीलिए हमने प्राकृत और पाली को Classical Language का दर्जा दिया.
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