काबुल: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर क्षेत्रीय हालात को गंभीर बना दिया है. ईद-उल-फितर के मौके पर तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने पाकिस्तान को सख्त संदेश देते हुए साफ कर दिया कि उनका संगठन किसी भी सैन्य दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर तालिबान डरने वाला होता, तो वह नाटो और पश्चिमी देशों के खिलाफ इतने लंबे समय तक संघर्ष नहीं कर पाता.
तालिबान का सख्त रुख, सैन्य दबाव को किया खारिज
कंधार के ईदगाह में हजारों लोगों को संबोधित करते हुए अखुंदजादा ने इशारों में पाकिस्तान की कार्रवाई पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हवाई हमले, गोलाबारी या किसी भी तरह का दबाव तालिबान की नीतियों को नहीं बदल सकता. इस बयान से साफ है कि तालिबान खुद को पहले से ज्यादा मजबूत और आत्मविश्वासी मान रहा है.
सीमा पर बढ़ा तनाव, ऑपरेशन के बाद हालात बिगड़े
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. पाकिस्तान ने हाल ही में ‘ऑपरेशन गजब लिल-हक’ के तहत सैन्य कार्रवाई की थी, जिसे ईद के दौरान कुछ समय के लिए रोका गया. हालांकि पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि यह रोक अस्थायी है और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई फिर शुरू की जा सकती है.
इसी बीच, रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में एक हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, जिससे हालात और अधिक बिगड़ गए हैं. संघर्ष विराम की घोषणा के बावजूद सीमा पर झड़पों और उल्लंघन की खबरें भी सामने आई हैं.
पाकिस्तान का भारत पर आरोप, सबूत नहीं दिए
तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत का नाम लेते हुए दावा किया है कि अफगान तालिबान की ओर से किए गए हालिया हमलों में भारतीय ड्रोन का इस्तेमाल हुआ है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने यह आरोप लगाया, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया.
पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने तालिबान के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि सीजफायर उल्लंघन के दावे “बेबुनियाद” हैं और तालिबान अपने कदमों को सही ठहराने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है.
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