देर रात थर्रा उठे लोग, 4.9 की तीव्रता से लगे भूकंप के झटके; अफगानिस्तान में घर छोड़कर भागे लोग

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भूकंप के झटके महसूस किए गए. यह भूकंप शुक्रवार रात लगभग 1 बजे आया.

earthquake tremors of 4.9 magnitude were felt in Afghanistan
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Pixabay

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में शुक्रवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान (एनसीएस) केंद्र के अनुसार, यह भूकंप शुक्रवार रात लगभग 1 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.9 मापी गई. भूकंप का केंद्र अक्षांश 36.48° उत्तर और देशांतर 71.45° पूर्व पर 160 किमी की गहराई में स्थित था. फिलहाल, इस भूकंप के कारण किसी तरह के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं आई है.

मार्च में भी एक हल्का भूकंप

इससे पहले, मार्च में भी एक हल्का भूकंप आया था जिसकी तीव्रता 4.0 थी. विशेषज्ञों के मुताबिक, उथले भूकंप गहरे भूकंपों की तुलना में ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं. अफगानिस्तान, जो भूकंपीय दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है, वहां लगातार भूकंपों का आना वहां रहने वाले लोगों के लिए बड़ी चुनौती है.

अफगानिस्तान में पहले भी कई गंभीर भूकंप आ चुके हैं और हिंदुकुश पर्वत श्रृंखला हमेशा से भूकंप के लिहाज से सक्रिय मानी जाती है. यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच स्थित है, और कई फॉल्ट लाइनों से गुजरता है, जिनमें से एक फॉल्ट लाइन हेरात से भी गुजरती है.

साल 2023 में आए भूकंप ने अफगानिस्तान में भयंकर तबाही मचाई थी. इस भूकंप में करीब 4 हजार लोगों की जान चली गई थी, जबकि 9 हजार से अधिक लोग घायल हुए थे. 13 हजार से ज्यादा घरों को भी भारी नुकसान हुआ था. उस समय भूकंप की तीव्रता 6.3 मापी गई थी, जिससे स्थिति और भी विकट हो गई थी.

यूएनओसीएचए का बयान

अफगानिस्तान भूकंप के लिए बेहद संवेदनशील क्षेत्र है. संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOCHA) के अनुसार, अफगानिस्तान को प्राकृतिक आपदाओं जैसे मौसमी बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का सामना लगातार करना पड़ता है. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, इससे पहले 4 फरवरी को भी अफगानिस्तान में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया था.

यूएनओसीएचए ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में बार-बार आने वाले भूकंपों से कमजोर और संकटग्रस्त समुदायों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है. ये समुदाय पहले ही दशकों के संघर्ष और विकास की कमी से जूझ रहे हैं, और इन भूकंपीयों का सामना करने के लिए उनकी क्षमता अब बेहद कम हो गई है.

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