ईरान को नहीं झुका पाओगे... खामेनेई ने अमेरिकी युद्धपोतों को लेकर दी चेतावनी, अब क्या करेंगे ट्रंप?

Khamenei Challenges Trump: ईरान और अमेरिका के बीच जेनेवा में परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही है. वॉशिंगटन, तेहरान पर परमाणु क्षमता खत्म करने का दबाव बना रहा है. इसके साथ ही अमेरिका की ओर से मिसाइल कार्यक्रम को भी सरेंडर करने की बात कही जा रही है.

You will not be able to bend Iran Khamenei warned about American warships what will Trump do now
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Khamenei Challenges Trump: ईरान और अमेरिका के बीच जेनेवा में परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही है. वॉशिंगटन, तेहरान पर परमाणु क्षमता खत्म करने का दबाव बना रहा है. इसके साथ ही अमेरिका की ओर से मिसाइल कार्यक्रम को भी सरेंडर करने की बात कही जा रही है. इसी बीच दोनों देशों के नेताओं के बयान से तनाव और बढ़ गया है.

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाम्ड ट्रंप के बयानों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान को खत्म करने का सपना देखना छोड़ दे. खामेनेई ने अमेरिकी सैन्य ताकत पर तंज कसते हुए कहा कि दुनिया की सबसे मजबूत सेना को भी ऐसा झटका लग सकता है, जिससे वह दोबारा खड़ी न हो सके.

अमेरिकी युद्धपोतों पर भी दी चेतावनी

खामेनेई ने खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों का जिक्र करते हुए कहा कि युद्धपोत भले ही खतरनाक हथियार हों, लेकिन उनसे भी ज्यादा खतरनाक वह हथियार है जो उन्हें समुद्र की गहराई में डुबो सकता है. इसे अमेरिका के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है.

“ईरान को नहीं झुका पाओगे”

अपने बयान में खामेनेई ने कहा कि पिछले 47 वर्षों में अमेरिका इस्लामी गणराज्य को खत्म नहीं कर सका है. उन्होंने इसे खुद अमेरिका की स्वीकारोक्ति बताया और कहा कि आगे भी ईरान को झुकाया नहीं जा सकेगा.

ट्रंप ने ईरान को दिया सख्त संदेश

खामेनेई की यह प्रतिक्रिया राष्ट्रपति ट्रंप के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे महत्वपूर्ण परमाणु वार्ता में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहेंगे. ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पिछले टकरावों से सबक सीखा है और अब बातचीत के लिए तैयार हो सकता है.

ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो उसके परिणाम होंगे. उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका पहले भी ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला कर चुका है. ट्रंप के अनुसार, अमेरिका समझौते के रास्ते को प्राथमिकता देता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सख्त कदम भी उठा सकता है. जेनेवा में चल रही बातचीत के बीच दोनों देशों के कड़े बयान यह दिखाते हैं कि हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं.

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