कतर स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बढ़ी सैन्य गतिविधि, क्या ईरान को लेकर ट्रंप उठाने वाले हैं बड़ा कदम?

    US Iran Tension: ईरान इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां भीतर उबलता गुस्सा और बाहर से बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव टकरा रहा है. बीते चार दिनों से पूरा देश लगभग डिजिटल अंधेरे में है. करीब 100 घंटे से इंटरनेट ठप है, फोन नेटवर्क बाधित हैं और ईरान बाकी दुनिया से लगभग कट चुका है.

    World Military activity increased American airbase in Qatar Trump going big step regarding Iran
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    US Iran Tension: ईरान इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां भीतर उबलता गुस्सा और बाहर से बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव टकरा रहा है. बीते चार दिनों से पूरा देश लगभग डिजिटल अंधेरे में है. करीब 100 घंटे से इंटरनेट ठप है, फोन नेटवर्क बाधित हैं और ईरान बाकी दुनिया से लगभग कट चुका है. लेकिन इस सन्नाटे के बीच जो आवाजें उठ रही हैं, वे पहले से कहीं ज्यादा तेज और बेचैन बताई जा रही हैं.

    इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है. ट्रंप ने रविवार को कहा था कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाते हैं, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने पर मजबूर हो सकता है. सवाल अब सिर्फ ईरान के अंदरूनी हालात का नहीं रहा, बल्कि यह भी उठने लगा है कि क्या ईरान अगला बड़ा अमेरिकी निशाना बनने की ओर बढ़ रहा है.

    इंटरनेट बंद, लेकिन विरोध की आग कायम

    ईरान में विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे और अब यह आंदोलन अपने 16वें दिन में प्रवेश कर चुका है. 8 जनवरी को जब देशभर में इंटरनेट बंद किया गया, उससे पहले ये प्रदर्शन 27 प्रांतों में फैल चुके थे और 156 से ज्यादा अलग-अलग घटनाएं दर्ज की गई थीं.

    हालांकि, 12 जनवरी तक इंटरनेट बंद रहने के कारण आधिकारिक रूप से दर्ज विरोध प्रदर्शन स्थलों की संख्या घटकर छह प्रांतों में सिर्फ 14 रह गई. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आंदोलन कमजोर पड़ गया है. विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इंटरनेट बंदी के चलते जमीनी हालात रिकॉर्ड नहीं हो पा रहे हैं, जबकि वास्तविकता में प्रदर्शन कई इलाकों में जारी हैं.

    मौतों का आंकड़ा और बढ़ता दमन

    मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अमेरिकी चेतावनी के बावजूद सरकारी कार्रवाई रुकी नहीं है. 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 650 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. यह आंकड़ा ईरान में जारी दमन की गंभीरता को दर्शाता है.

    इंटरनेशनल कॉन्फ्लिक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप, इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर का कहना है कि कई ऐसे इलाके हैं, जहां 12 जनवरी को कोई विरोध दर्ज नहीं हुआ, लेकिन वहां भी प्रदर्शन जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं. यानी इंटरनेट बंदी ने विरोध को खत्म नहीं किया, बल्कि उसे अदृश्य बना दिया है.

    अमेरिका की चेतावनी और बढ़ती सैन्य हलचल

    ईरान में हालात जितने बिगड़ते जा रहे हैं, उतनी ही तेजी से मध्य पूर्व में अमेरिकी गतिविधियां भी बढ़ती दिख रही हैं. इंडिया टुडे ने ओपन-सोर्स डेटा और फ्लाइट-ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म फ्लाइटराडार24 की मदद से अमेरिकी सैन्य हलचल पर नजर डाली है.

    फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक कतर स्थित अल उदीद एयर बेस पर अमेरिकी सैन्य विमानों की आवाजाही में बढ़ोतरी देखी गई है. मीडिया रिपोर्ट्स में भी दावा किया जा रहा है कि यहां ऑपरेशनल गतिविधियां सामान्य से ज्यादा हैं. यह वही एयर बेस है, जिसे अमेरिका मध्य पूर्व में अपने सबसे अहम सैन्य ठिकानों में गिनता है.

    क्या ईरान बनेगा अगला बड़ा टकराव?

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सब किसी बड़े टकराव की भूमिका है. ईरान के अंदर जनविद्रोह, इंटरनेट और सूचना पर कड़ा नियंत्रण, सैकड़ों मौतें और दूसरी ओर अमेरिका की खुली चेतावनी, ये सभी संकेत किसी साधारण राजनीतिक संकट से कहीं आगे जाते नजर आते हैं.

    विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई से बचेगा, लेकिन अगर हालात और बिगड़े और हिंसा का स्तर बढ़ा, तो अंतरराष्ट्रीय दखल की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. ईरान के लिए यह सिर्फ आंतरिक स्थिरता की परीक्षा नहीं है, बल्कि वैश्विक राजनीति के दबावों से जूझने का भी समय है.

    अंधेरे में डूबा देश, अनिश्चित भविष्य

    आज ईरान एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां न इंटरनेट है, न खुली जानकारी, और न ही लोगों के पास अपनी आवाज दुनिया तक पहुंचाने का आसान जरिया. लेकिन इसके बावजूद विरोध की आग बुझी नहीं है.

    दुनिया की नजरें अब ईरान पर टिकी हैं, क्या यह आंदोलन और तेज होगा, क्या अमेरिका अपनी चेतावनी को अमल में लाएगा, या फिर हालात किसी नई दिशा में मुड़ेंगे. फिलहाल इतना तय है कि ईरान का यह संकट सिर्फ एक देश की कहानी नहीं रहा, बल्कि वैश्विक राजनीति का एक अहम अध्याय बन चुका है.

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