Why 21 Durva and Modak to Ganesha Ji: गणेश उत्सव के दौरान घरों और पंडालों में विराजे गणपति बप्पा की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है. इस दौरान उन्हें मोदक, दूर्वा और लाल फूल जैसी प्रिय चीजें अर्पित की जाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणपति को 21 मोदक और 21 दूर्वा ही क्यों चढ़ाई जाती हैं? धार्मिक मान्यताओं में इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और आध्यात्मिक अर्थ बताए गए हैं, जो 21 अंक को गणेश पूजा से खास तौर पर जोड़ते हैं.
21 मोदक के पीछे जुड़ी है ये कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ऋषि अत्रि की पत्नी देवी अनुसूया ने भगवान शिव, माता पार्वती और बाल गणेश को भोजन के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि जब तक बाल गणेश पूरी तरह तृप्त नहीं होंगे, तब तक किसी और को भोजन नहीं कराया जाएगा. बाल गणेश लगातार भोजन करते रहे, लेकिन उनकी भूख शांत नहीं हुई. जब भोजन लगभग समाप्त हो गया तो देवी अनुसूया ने उन्हें विशेष मिठाई के रूप में मोदक खिलाया.
मोदक खाते ही शांत हुई गणेश जी की भूख
मान्यता है कि मोदक खाने के बाद बाल गणेश पूरी तरह तृप्त हो गए और उन्हें जोरदार डकार आई. इसी दौरान भगवान शिव को भी 21 बार डकार आने की कथा कही जाती है. यह देखकर माता पार्वती ने मोदक के प्रभाव और गणेश जी की तृप्ति का रहस्य जाना. इसके बाद उन्होंने कहा कि जो भक्त गणेश जी को प्रसन्न करना चाहता है, वह उन्हें 21 मोदक का भोग लगाए. तभी से गणपति को 21 मोदक चढ़ाने की परंपरा मानी जाती है.
21 दूर्वा से शांत हुई गणेश जी की जलन
21 दूर्वा अर्पित करने के पीछे भी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा बताई जाती है. कथा के अनुसार अनलासुर नाम के एक दैत्य ने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था. देवताओं और ऋषियों की प्रार्थना पर भगवान गणेश ने उसका अंत करने के लिए उसे निगल लिया. इसके बाद गणेश जी के पेट में तेज गर्मी और जलन होने लगी. भगवान शिव समेत कई देवताओं ने इसे शांत करने का प्रयास किया, लेकिन राहत नहीं मिली. तब कश्यप ऋषि और अन्य मुनियों ने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर गणेश जी को अर्पित कीं. दूर्वा ग्रहण करने के बाद उनकी जलन शांत हो गई. इसी घटना से 21 दूर्वा चढ़ाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है.
आखिर 21 अंक ही क्यों है खास?
धार्मिक मान्यताओं में 21 को पूर्ण और शुभ संख्या माना गया है. इसे मनुष्य के संपूर्ण अस्तित्व से भी जोड़कर देखा जाता है. एक मान्यता के अनुसार 5 ज्ञानेन्द्रियां, 5 कर्मेन्द्रियां, 5 महाभूत, 5 तन्मात्राएं और 1 मन मिलकर 21 का स्वरूप बनाते हैं. वहीं दूसरी मान्यता में 5 ज्ञानेन्द्रियां, 5 कर्मेन्द्रियां, 5 प्राण, 5 उपप्राण और 1 मन को 21 से जोड़ा जाता है. इस तरह गणेश जी को 21 चीजें अर्पित करना अपने संपूर्ण अस्तित्व को भगवान के चरणों में समर्पित करने का प्रतीक माना जाता है.
21 दूर्वा अर्पित करने से क्या लाभ माना जाता है?
धार्मिक विश्वास के अनुसार गणपति को दूर्वा बेहद प्रिय है और इसे अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं. गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए 21 दूर्वा चढ़ाने से जीवन की बाधाएं और परेशानियां दूर होने की मान्यता है. बुधवार या गणेश चतुर्थी के दिन 21 दूर्वा पर हल्दी का हल्का लेप लगाकर भगवान गणेश को अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे भक्त की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है.
मोदक और दूर्वा में छिपा है समर्पण का भाव
गणपति पूजा में 21 मोदक और 21 दूर्वा चढ़ाने की परंपरा सिर्फ संख्या तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि इसके पीछे श्रद्धा और समर्पण की भावना भी जुड़ी है. मोदक को ज्ञान और आनंद का प्रतीक माना जाता है, जबकि दूर्वा को शीतलता और शुद्धता से जोड़ा जाता है. इसलिए गणेश उत्सव के दौरान बप्पा को 21 मोदक और 21 दूर्वा अर्पित करना भक्त के लिए अपनी श्रद्धा, भावनाओं और पूरे अस्तित्व को गणपति के चरणों में समर्पित करने का एक धार्मिक प्रतीक माना जाता है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. भारत 24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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