DRDO Missile Testing Centre: पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले में देश के डिफेंस सेक्टर से जुड़ा एक बड़ा प्रोजेक्ट आने वाला है. जुनपुट गांव में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के नए मिसाइल और रडार परीक्षण केंद्र को मंजूरी मिल गई है. इस फैसले को भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. इससे भविष्य में मिसाइल और रडार सिस्टम के परीक्षण के लिए देश के पास एक और महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध होगी.
शुभेंदु अधिकारी ने दी प्रोजेक्ट को मंजूरी की जानकारी
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान इस प्रोजेक्ट को लेकर जानकारी दी. उन्होंने बताया कि DRDO की ओर से पहले इस परियोजना के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन तत्कालीन TMC सरकार की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया था. अधिकारी ने कहा कि अब उन्होंने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है और यह पश्चिम बंगाल के विकास के लिए एक बड़ा प्रोजेक्ट साबित होगा. DRDO के एक सूत्र ने भी बंगाल में मिसाइल टेस्टिंग प्रोजेक्ट शुरू होने की पुष्टि की है. इससे संकेत मिलता है कि जुनपुट में प्रस्तावित सुविधा आने वाले समय में देश के रक्षा परीक्षण ढांचे का अहम हिस्सा बन सकती है.
2024 में सामने आया था टेस्टिंग रेंज का प्रस्ताव
दरअसल, अप्रैल 2024 में DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्टिंग रेंज के अलावा पूर्वी मेदिनीपुर के तट पर एक और टेस्टिंग रेंज स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि, उस समय जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी थी. अब मंजूरी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है.
DRDO का तीसरा बड़ा मिसाइल टेस्टिंग सेंटर
जुनपुट में प्रस्तावित टेस्टिंग रेंज, चांदीपुर की मौजूदा सुविधाओं और आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित टेस्टिंग सेंटर के बाद DRDO की तीसरी बड़ी मिसाइल टेस्टिंग सुविधा होगी. देश में मिसाइलों के परीक्षण के लिए ओडिशा स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज बेहद अहम है, जहां दो लॉन्च कॉम्प्लेक्स के जरिए अलग-अलग तरह के हथियारों का परीक्षण किया जाता है.
चांदीपुर में अलग-अलग मिसाइलों का होता है परीक्षण
चांदीपुर-ऑन-सी स्थित लॉन्च कॉम्प्लेक्स-III का इस्तेमाल मुख्य रूप से कम दूरी की सामरिक मिसाइलों, सतह से हवा में मार करने वाले सिस्टम और आकाश व पिनाका जैसे मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर के परीक्षण के लिए किया जाता है. वहीं, लॉन्च कॉम्प्लेक्स-IV को लंबी दूरी के रणनीतिक हथियारों के परीक्षण के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसमें अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल सीरीज और K-सीरीज की पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली मिसाइलें शामिल हैं. जुनपुट में नई सुविधा तैयार होने के बाद भारत के पास मिसाइल और रडार सिस्टम के परीक्षण के लिए एक और अहम केंद्र होगा. इससे देश के डिफेंस रिसर्च और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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