US Attack On Venezuela: अमेरिका ने शनिवार को दक्षिण अमेरिका में स्थित वेनेजुएला को निशाना बनाया. इस हमले की पुष्टि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की, जिसके बाद यह खबर सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गई. काराकास में हुए धमाकों और आग के गुबारों के वीडियो वायरल हुए, जिनमें हमले के बाद की स्थिति देखी जा सकती है. अमेरिका और वेनेजुएला के बीच यह ताजा विवाद एक लंबी राजनीतिक और कूटनीतिक कहानी का हिस्सा है. सवाल उठता है कि आखिर दोनों देशों के बीच इतना तनाव क्यों है और ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला को निशाना क्यों बना रहा है?
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हालिया घटनाक्रम
हालिया घटना का कारण वेनेजुएला और अमेरिका के बीच दशकों पुराना विवाद है, जो 2025 में और भी गंभीर हो गया. अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ एक के बाद एक कई सैन्य और कूटनीतिक कदम उठाए हैं. इन कदमों के कारण दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़ते गए हैं. आइए जानते हैं कि ये घटनाएँ क्या हैं:
1. वेनेजुएला की नावों पर हमले
2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाना शुरू किया. ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला की नावों को निशाना बनाना शुरू किया, जिससे कई नावें और इन पर सवार 100 से ज्यादा लोग मारे गए. अमेरिका का दावा है कि इन नावों में मादक पदार्थों की तस्करी हो रही थी, हालांकि वेनेजुएला ने इन दावों का खंडन किया और इसे पूरी तरह से बेबुनियाद बताया. इस मुद्दे को वेनेजुएला ने संयुक्त राष्ट्र में भी उठाया था.
2. कैरिबियाई सागर में अमेरिकी सैन्य तैनाती
अक्टूबर 2025 में, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अपनी सबसे आधुनिक और खतरनाक युद्धपोतों में से एक, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड, को कैरिबियाई सागर में तैनात किया. इसके साथ ही 5000 अमेरिकी सैनिकों को वेनेजुएला के आसपास तैनात किया गया, जो इस क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती है. इस सैन्य दबाव ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया.
3. वेनेजुएला के तेल टैंकरों की जब्ती
अमेरिका ने वेनेजुएला पर तेल प्रतिबंध लगा रखा है और उसके तेल टैंकरों को खुले तौर पर जब्त कर लिया है. वेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिकी दबाव को बढ़ाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने नौसैनिक नाकाबंदी भी की.
4. सीआईए को वेनेजुएला पर कार्रवाई की मंजूरी
ट्रंप ने एक बार कहा था कि उन्होंने वेनेजुएला पर खुफिया कार्रवाई की मंजूरी दे दी है. इसके बाद यह संकेत मिला कि अमेरिका का हमला अब केवल नावों तक सीमित नहीं रहेगा और वह वेनेजुएला के अंदर तक अपनी कार्रवाई बढ़ा सकता है.
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर आरोप
अमेरिका ने वेनेजुएला पर यह आरोप लगाया है कि उसका शासन अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी में लिप्त है. विशेष रूप से फेंटेनाइल और कोकीन के व्यापार में वेनेजुएला का नाम लिया गया है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि मादुरो शासन के कारण वेनेजुएला के लाखों नागरिक अमेरिका में प्रवास करने के लिए मजबूर हुए हैं, जिससे अमेरिका में प्रवासी संकट बढ़ा है. इन आरोपों के आधार पर ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला को लगातार निशाना बनाना शुरू किया.
वेनेजुएला की प्रतिक्रिया
वेनेजुएला ने अमेरिकी आरोपों को सिरे से नकारा किया है. वेनेजुएला का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन इन आरोपों का इस्तेमाल सिर्फ एक बहाने के रूप में कर रहा है ताकि वेनेजुएला की तेल संपत्ति पर कब्जा किया जा सके. वेनेजुएला का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई एक ऐसे देश के संसाधनों को लूटने की योजना है, जो अपने तेल का राष्ट्रीयकरण करने में सफल रहा है.
विवाद की जड़: तेल और शक्ति संघर्ष
अमेरिका और वेनेजुएला के विवाद की जड़ में एक अहम वजह है - तेल. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जो अमेरिका के लिए काफी आकर्षक हो सकता है. वेनेजुएला का तेल उद्योग राष्ट्रीयकरण के बाद अमेरिका की कंपनियाँ इसमें निवेश करने में सक्षम नहीं हो पाईं. इसके बाद से अमेरिका ने वेनेजुएला पर दबाव बनाना शुरू किया ताकि वह अपने तेल संसाधनों का नियंत्रण खोले.
1999 में ह्यूगो शावेज के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ने लगे. शावेज ने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया और देश की संपत्ति को अपनी जनता के फायदे में लगाने की कोशिश की. इसका अमेरिका के लिए सीधा मतलब था कि वह वेनेजुएला के तेल से हाथ नहीं मिला सकता था.
दक्षिण अमेरिका में अमेरिकी वर्चस्व
अमेरिका के लिए वेनेजुएला का महत्व सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है. वेनेजुएला के पास सोना और गैस जैसे अन्य प्राकृतिक संसाधन भी हैं. ट्रंप प्रशासन के लिए, वेनेजुएला पर नियंत्रण स्थापित करना एक तरह से दक्षिण अमेरिका में अपनी शक्ति और वर्चस्व को बनाए रखने का कदम है. अमेरिका की नज़रें वेनेजुएला के तेल उद्योग पर हैं, और इसीलिए वेनेजुएला पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं.
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