क्रिसमस की छुट्टियां मना रहे लोग और बंद पड़े बैंक, सरकारी संस्थान—यह सब चोरों के लिए एक मौका साबित हुआ. पश्चिमी जर्मनी में एक अत्यधिक सुरक्षित बैंक में अपराधियों ने इतनी शातिराई से सुरंग बनाई, कि उन्होंने 3000 तिजोरियों को तोड़कर 300 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की चोरी कर ली. यह घटना उस वक्त हुई, जब अधिकांश संस्थान बंद थे और देश भर में उत्सव का माहौल था. आइए जानते हैं कि कैसे इन चोरों ने एक हॉलीवुड फिल्म जैसा अपराध अंजाम दिया.
स्पार्कसे बैंक में घुसी सुरंग
जर्मनी के गेलसेनकिर्चेन शहर में स्थित स्पार्कसे सेविंग बैंक को लक्ष्य बनाकर अपराधियों ने बड़ी सफाई से अपनी योजना को अंजाम दिया. चोरों ने बैंक के अंडरग्राउंड लॉकर रूम में घुसने के लिए एक सुरंग खोदी और उसके बाद तिजोरियों से पैसे और कीमती सामान निकालकर फरार हो गए. यह कृत्य इतनी सटीकता से किया गया कि पुलिस भी इसे एक पेशेवर अपराध मान रही है. अनुमानित 30 मिलियन यूरो (करीब 300 करोड़ रुपये) नकद और कीमती सामान चोरी किया गया.
कैसे किया गया अपराध?
पुलिस के मुताबिक, चोरों ने पार्किंग गैरेज से सुरंग खोदने की शुरुआत की थी, जहां से वे सीधे बैंक के लॉकर रूम तक पहुंचे. इस दौरान अपराधियों ने बड़ी ड्रिल मशीन का इस्तेमाल किया, ताकि तिजोरियों तक पहुंचने में कोई रुकावट न आए. चोरी के बाद, चोर उसी सुरंग के रास्ते से कीमती सामान और नकद लेकर आराम से फरार हो गए.
सीसीटीवी फुटेज से मिली अहम जानकारी
जब इस घटना के बारे में पुलिस को पता चला, तो सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की गई. फुटेज में सोमवार सुबह एक काले ऑडी कार में बैठे छह नकाबपोश लोग पार्किंग गैरेज से बाहर निकलते हुए नजर आए. पुलिस ने यह भी बताया कि इस वाहन का नंबर प्लेट पहले हनोवर शहर से चोरी हो चुका था, जिससे यह साबित हुआ कि अपराधी पूरी तरह से योजनाबद्ध थे.
ग्राहकों के लिए बड़ा सदमा
चोरी के बाद बैंक के बाहर ग्राहकों की भीड़ लग गई. विशेष रूप से तुर्की मूल के कई ग्राहक जिन्होंने अपनी सोने की जूलरी और अन्य कीमती सामान बैंक के लॉकर रूम में रखे थे, वे इस घटना से खासे परेशान थे. उनके पास इंश्योरेंस जरूर था, लेकिन नुकसान की रकम उस सामान के वास्तविक मूल्य से काफी कम थी. बैंक ने ग्राहकों को एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया, जिससे वे अपना नुकसान दावा कर सकें.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बैंक के बाहर भारी पुलिस तैनात की गई थी, क्योंकि वहां आए हुए ग्राहकों का गुस्सा बढ़ रहा था. बैंक ने भी सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पुलिस को पर्याप्त सहयोग दिया. यह घटना जर्मनी के अत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले बैंकिंग क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाती है.
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