'हम कतर नहीं है जो चुपचाप बैठ जाएंगे...', ईरान जंग के बीच पाकिस्तान ने इजरायल को क्यों दी धमकी?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान ने इजरायल को लेकर सख्त रुख अपनाया है.

Why did Pakistan threaten Israel amid Iran war attacks near the embassy
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान ने इजरायल को लेकर सख्त रुख अपनाया है. इस्लामाबाद ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर उसके किसी भी नागरिक या राजनयिक को नुकसान पहुंचा, तो वह चुप नहीं बैठेगा और करारा जवाब देगा. पाकिस्तान ने यह भी कहा कि वह कतर की तरह निष्क्रिय रहने वाला देश नहीं है, बल्कि अपने लोगों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाएगा.

यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान की राजधानी तेहरान में पाकिस्तानी दूतावास के पास हवाई हमले हुए. इन हमलों को अमेरिका और इजरायल से जोड़कर देखा जा रहा है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दूतावास या वहां मौजूद स्टाफ को कोई सीधा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन आसपास के इलाकों में धमाकों से काफी असर पड़ा और कई इमारतें हिल गईं.

इसी घटना के बाद पाकिस्तान ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि दुनिया में कहीं भी उसके राजनयिकों को खतरा हुआ तो उसका जवाब सख्ती से दिया जाएगा.

28 दिन से जारी है संघर्ष

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह टकराव अब 28वें दिन में पहुंच चुका है. तेहरान, काशान और अबादान जैसे शहरों में लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं.

बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को हुए बड़े हमले के बाद हालात और बिगड़ गए थे. उसी हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर आई थी. इसके बाद ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था. हालांकि भारत, पाकिस्तान समेत कुछ देशों के लिए इसे आंशिक रूप से खुला रखा गया है.

पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें

इस पूरे संकट के बीच पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में भी पेश करने की कोशिश कर रहा है. इस्लामाबाद ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका और ईरान तैयार हों, तो वह दोनों देशों के बीच बातचीत की मेजबानी कर सकता है.

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए बातचीत ही सबसे बेहतर रास्ता है और वे इसके लिए मंच उपलब्ध कराने को तैयार हैं.

ट्रंप ने दी नई डेडलाइन

दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक नई समयसीमा दी है. उन्होंने कहा है कि ईरान को 6 अप्रैल तक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोलना होगा.

ट्रंप के मुताबिक, इस अवधि के दौरान किसी तरह की सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी. लेकिन अगर ईरान ने बात नहीं मानी, तो उसके पावर प्लांट्स को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया जा सकता है.

बातचीत पर अलग-अलग दावे

ट्रंप ने यह भी कहा कि बातचीत जारी है और हालात नियंत्रण में हैं, भले ही मीडिया में अलग-अलग दावे किए जा रहे हों. वहीं ईरान ने साफ किया है कि उसने अमेरिका के साथ किसी औपचारिक बातचीत की बात से इनकार किया है.

ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके “मित्र देशों” के लिए खुला है, लेकिन वह किसी दबाव में आकर फैसला नहीं लेगा.

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