मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने मिसाइल हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है. जंग के करीब 28वें दिन ईरान ने इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए 400 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इन हमलों में सबसे ज्यादा चर्चा जुल्फिकार मिसाइल की हो रही है, जिसे रोकना काफी मुश्किल माना जा रहा है.
ऑपरेशन में जुल्फिकार का इस्तेमाल
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने सैन्य अभियान के अलग-अलग चरणों में जुल्फिकार मिसाइल का इस्तेमाल किया. रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलों के दौरान इजराइल के तेल अवीव, हाइफा और दिमोना जैसे इलाकों में नुकसान हुआ है.
जुल्फिकार, फतेह-110 परिवार की उन्नत मिसाइल मानी जाती है, जिसे 2016 के बाद विकसित किया गया और अब इसे युद्ध में सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है.
जुल्फिकार मिसाइल की प्रमुख खूबियां
इस मिसाइल को खास बनाने वाली कई तकनीकी विशेषताएं हैं:
सबसे अहम बात यह है कि उड़ान के दौरान इसका वारहेड अलग हो जाता है, जिससे रडार के जरिए इसे ट्रैक करना और रोकना मुश्किल हो जाता है.
डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती
इन मिसाइलों को रोकने के लिए इजराइल और अमेरिका के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हैं, जैसे:
इजराइल का दावा है कि उसने बड़ी संख्या में मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन लगातार हमलों के कारण इन सिस्टम पर दबाव बना हुआ है.
‘डेजफुल’ समेत अन्य मिसाइलें भी सक्रिय
जुल्फिकार के अलावा ईरान ने Dezful missile जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है.
यह जुल्फिकार का उन्नत संस्करण माना जाता है और लंबी दूरी के लक्ष्यों पर हमले के लिए उपयोगी है.
इसके अलावा Haj Qasem missile और Kheibar Shekan missile जैसी मिसाइलें भी इस्तेमाल में लाई जा रही हैं, जो सटीक निशाने और बेहतर गाइडेंस के लिए जानी जाती हैं.
इन सभी मिसाइलों को मोबाइल लॉन्चर (TEL) के जरिए दागा जा रहा है. इससे ईरान को यह फायदा मिलता है कि वह अपनी मिसाइल यूनिट्स को लगातार स्थान बदलकर सुरक्षित रख सकता है और हमले जारी रख सकता है.
ये भी पढ़ें- देश में लॉकडाउन लगेगा या नहीं? सरकार ने दे दिया जवाब, हरदीप सिंह पुरी ने बताई कैसी है तैयारी