852 मीटर ऊंची एक गुफा, आठ तुर्की सैनिकों की लाशें; एर्दोगन के जवानों को इराक में किसने मारा?

उत्तरी इराक में तुर्की सेना के लिए एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है.

Who killed Erdogan eight Turkish soldiers in Iraq
एर्दोगन | Photo: ANI

उत्तरी इराक में तुर्की सेना के लिए एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है. तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रविवार को एक गुफा में खुफिया खोजी अभियान के दौरान आठ तुर्की सैनिकों की मीथेन गैस के प्रभाव से मौत हो गई. यह हादसा उस समय हुआ जब सैनिक 2022 में कुर्दिश आतंकवादियों द्वारा मारे गए एक साथी सैनिक के अवशेषों की तलाश में लगे थे. यह घटना सैनिकों के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण मोड़ लेकर आई, जब गैस के संपर्क में आने से आठ जवानों की दम घुटने से मौत हो गई.

घटना की जानकारी

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, तुर्की के सैनिक उत्तरी इराक में एक पहाड़ी गुफा में खोज करने पहुंचे थे, जो 852 मीटर (लगभग 2,795 फीट) की ऊंचाई पर स्थित थी. वे इस गुफा में 2022 में मारे गए एक सैन्य अधिकारी के अवशेषों की तलाश कर रहे थे, जिनकी मौत PKK (कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी) के आतंकवादियों द्वारा गोलीबारी में हुई थी. गुफा का उपयोग पहले PKK द्वारा एक अस्पताल के रूप में किया गया था, लेकिन बाद में तुर्की सेना ने इसे साफ कर दिया था.

गैस का प्रभाव और मौतें

इन सैनिकों ने गुफा में खोज के दौरान मीथेन गैस के संपर्क में आकर अपना जीवन गंवा दिया. मंत्रालय ने जानकारी दी कि 19 सैनिकों में से आठ सैनिक गैस के प्रभाव से गंभीर रूप से प्रभावित हुए और उन्हें अस्पताल ले जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. मंत्रालय ने इस घटना के लिए 'क्लॉ-लॉक ऑपरेशन क्षेत्र' का उल्लेख किया है, जिसे अप्रैल 2022 में कुर्दिश आतंकवादियों के खिलाफ शुरू किया गया था.

खोजी अभियान और संघर्ष

यह खोजी अभियान मई 2022 से जारी था, जब उस क्षेत्र में एक सर्च-एंड-क्लियर ऑपरेशन के दौरान एक तुर्की अधिकारी की मौत हो गई थी. मंत्रालय ने यह भी बताया कि तीन साल से तुर्की की टीमें उस सैनिक के अवशेषों की तलाश में थीं, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिल पाई थी.

तुर्की और PKK के बीच पिछले चार दशकों से संघर्ष चल रहा है, जो इराक और सीरिया के बॉर्डर तक फैला हुआ है. इस दौरान तुर्की ने उत्तरी इराक में कई ठिकाने बनाए हैं, जहां PKK की उपस्थिति दशकों से रही है. हालांकि, अब दोनों पक्षों के बीच एक समझौता होने की खबरें आई हैं, जिसके तहत PKK के लड़ाके अगले कुछ दिनों में अपने हथियार सौंपने की उम्मीद कर रहे हैं.

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