व्हाइट हाउस की एक मीटिंग और इजरायल की खुफिया रिपोर्ट... आखिर क्यों ट्रंप ने तोड़ दिया सीजफायर?

US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद कुछ समय के लिए हालात सामान्य होते नजर आए थे. दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद थी, लेकिन करीब 20 दिन बाद ही यह समझौता टूट गया और एक बार फिर दोनों के बीच सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई.

White House meeting Israeli intelligence report exactly did Trump break the ceasefire iran
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US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद कुछ समय के लिए हालात सामान्य होते नजर आए थे. दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद थी, लेकिन करीब 20 दिन बाद ही यह समझौता टूट गया और एक बार फिर दोनों के बीच सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तीन जहाजों पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ फिर से हमला शुरू कर दिया. इसके जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया.

अमेरिका का बड़ा हमला, ईरान का जवाब

अमेरिकी सेना के अनुसार, 11 जुलाई को ईरान के 140 ठिकानों पर हवाई हमले किए गए. वहीं, ईरान का कहना है कि उसने जवाबी कार्रवाई के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है. हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट अभी भी जहाजों की आवाजाही के लिए खुला है.

ट्रंप ने क्यों बदला फैसला?

बताया जा रहा है कि सीजफायर खत्म करने का फैसला उस समय लिया गया, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए तुर्किए जाने की तैयारी कर रहे थे.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ट्रंप को जानकारी दी कि होर्मुज स्ट्रेट में तीन जहाजों पर हमला हुआ है. इनमें एक एलएनजी टैंकर भी शामिल था. इसके बाद ट्रंप ने अपने सलाहकारों से पूछा कि क्या ईरान वास्तव में शांति चाहता है. चर्चा के बाद उन्होंने माना कि ईरान बातचीत में गंभीर नहीं है.

ट्रंप ने ईरान पर लगाए आरोप

नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि अब सीजफायर खत्म हो चुका है. उन्होंने ईरान पर भरोसा न करने की बात कही और कहा कि वह अब किसी नए समझौते के पक्ष में नहीं हैं. अमेरिकी अधिकारियों का भी कहना है कि ईरान ने हिंसा का रास्ता चुना, इसलिए अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की.

इजरायल की खुफिया जानकारी भी बनी चर्चा

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि इजरायल की खुफिया एजेंसियों ने अमेरिका को जानकारी दी थी कि ईरान कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की योजना बना रहा है. बताया गया कि इसी आधार पर ट्रंप की सुरक्षा बढ़ाई गई और इस जानकारी पर अमेरिकी एजेंसियों ने भी नजर रखी. हालांकि, कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह खुफिया जानकारी अमेरिका के फैसले को प्रभावित करने की कोशिश भी हो सकती थी.

ट्रंप ने खुद को बताया 'नंबर-1 टारगेट'

हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान की कथित "किल लिस्ट" में सबसे ऊपर हैं. उन्होंने कहा कि वह ईरान के लिए सबसे बड़े विरोधी हैं और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा सकता है.

आगे क्या होगा?

एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच हालात तनावपूर्ण हो गए हैं. दोनों देशों की सैन्य कार्रवाई से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है. ईरान का दावा है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है, जबकि अमेरिका का कहना है कि समुद्री मार्ग अभी भी खुला है. इस बीच दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत भी लगभग रुक गई है. ट्रंप भी कह चुके हैं कि उन्हें अब बातचीत से किसी बड़े नतीजे की उम्मीद नहीं है.

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