क्या है थिएटर कमांड, जिससे बदल जाएगी भारतीय सेना की युद्ध नीति? आसान भाषा में समझिए क्यों है अहम

Theater Command India: भारतीय सेना में लंबे समय से जिस बड़े बदलाव की चर्चा हो रही थी, वह अब जल्द लागू हो सकता है. करीब 20 साल से यह योजना सिर्फ फाइलों, बैठकों और चर्चाओं तक सीमित थी, लेकिन अब इसे जमीन पर उतारने की तैयारी चल रही है.

Theatre Command that will transform the Indian Army war strategy Understand in simple terms significant
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Theater Command India: भारतीय सेना में लंबे समय से जिस बड़े बदलाव की चर्चा हो रही थी, वह अब जल्द लागू हो सकता है. करीब 20 साल से यह योजना सिर्फ फाइलों, बैठकों और चर्चाओं तक सीमित थी, लेकिन अब इसे जमीन पर उतारने की तैयारी चल रही है. नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणी इस योजना का अंतिम ड्राफ्ट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंप सकते हैं. माना जा रहा है कि कारगिल विजय दिवस के बाद इस पर अहम प्रस्तुति दी जाएगी.

अभी व्यवस्था कैसी है?

इस समय भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना अलग-अलग तरीके से काम करती हैं. तीनों की अपनी ट्रेनिंग, अपनी योजना और अपना कमांड सिस्टम है. किसी बड़े ऑपरेशन या युद्ध के समय ये एक-दूसरे के साथ मिलकर काम तो करती हैं, लेकिन इनके लिए कोई एक संयुक्त कमांड नहीं है.

थिएटर कमांड क्या है?

नई व्यवस्था में तीनों सेनाओं को एक साथ जोड़कर अलग-अलग थिएटर कमांड बनाई जाएंगी. हर कमांड एक खास इलाके की जिम्मेदारी संभालेगी. उस इलाके में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के सभी सैनिक और संसाधन एक ही कमांडर के अधीन होंगे. वही कमांडर तय करेगा कि किस स्थिति में किस सेना का इस्तेमाल कैसे करना है. इससे फैसले जल्दी लिए जा सकेंगे और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल रहेगा.

कितनी थिएटर कमांड बन सकती हैं?

शुरुआती योजना के अनुसार देश में तीन मुख्य थिएटर कमांड बनाई जा सकती हैं.

  • उत्तरी थिएटर कमांड- चीन सीमा की सुरक्षा पर ध्यान देगी.
  • पश्चिमी थिएटर कमांड- पाकिस्तान सीमा की जिम्मेदारी संभालेगी.
  • मैरीटाइम थिएटर कमांड- समुद्री सीमा और हिंद महासागर की सुरक्षा देखेगी.

हर थिएटर कमांड की कमान एक फोर-स्टार अधिकारी के हाथ में होगी. उनका पद सेना, नौसेना और वायु सेना प्रमुख के बराबर माना जाएगा.

इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

आज के समय में युद्ध सिर्फ जमीन, समुद्र या हवा तक सीमित नहीं है. अब साइबर हमले और अंतरिक्ष भी युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में अगर तीनों सेनाएं अलग-अलग काम करें तो फैसले लेने में समय लग सकता है. थिएटर कमांड बनने के बाद तीनों सेनाएं पहले से ही एक साथ काम करेंगी, जिससे किसी भी संकट में तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी.

सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

यह आजादी के बाद भारतीय सेना का सबसे बड़ा सैन्य सुधार माना जा रहा है. इसलिए इसे लागू करना आसान नहीं है. सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदारियों के बंटवारे का है. सैनिकों की भर्ती, ट्रेनिंग और नए हथियार खरीदने का काम पहले की तरह तीनों सेनाओं के प्रमुखों के पास रहेगा. 

लेकिन युद्ध या किसी बड़े ऑपरेशन के दौरान उन सैनिकों और संसाधनों का इस्तेमाल कैसे करना है, इसका फैसला थिएटर कमांडर करेगा. इसी जिम्मेदारी और बजट के बंटवारे को लेकर अभी अंतिम स्तर पर चर्चा चल रही है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो भारत की सैन्य व्यवस्था में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

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