टेक्सटाइल, ज्वेलरी से लेकर सी-फूड तक... अमेरिकी टैरिफ घटने से भाारत के इन सेक्टर्स को होगा फायदा

भारत और अमेरिका के बीच हुए नए ट्रेड अंडरस्टैंडिंग को भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.

Which sectors of India will benefit from the reduction in American tariffs
Which sectors of India will benefit from the reduction in American tariffs

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए नए ट्रेड अंडरस्टैंडिंग को भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है. पिछले साल अप्रैल से अगस्त के बीच अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए थे, जो कुछ मामलों में 50 प्रतिशत तक पहुंच गए थे. इन ऊंचे शुल्कों की वजह से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ गई थी और कई एक्सपोर्टर्स के ऑर्डर घटने लगे थे.

अब ताजा फैसले के तहत अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए जाने वाले ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. इस कदम से अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में दोबारा तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है. टैरिफ कम होने से भारत के कई प्रमुख निर्यात सेक्टरों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है, जिनमें टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, आईटी सर्विसेज, इंजीनियरिंग गुड्स और समुद्री उत्पाद शामिल हैं.

चीन के मुकाबले भारत को रणनीतिक बढ़त

इस टैरिफ कटौती का एक बड़ा रणनीतिक फायदा यह है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद अब चीन की तुलना में सस्ते पड़ेंगे. जहां भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा, वहीं चीन पर अभी भी करीब 34 प्रतिशत शुल्क बना हुआ है. इस अंतर के चलते अमेरिकी आयातक और वैश्विक खरीदार सप्लाई के लिए भारत की ओर अधिक झुक सकते हैं.

इस बदलाव से भारतीय कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी, साथ ही पहले से मौजूद ग्राहकों के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे. ऑर्डर वॉल्यूम बढ़ने से उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग होगा और कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन में भी सुधार हो सकता है.

टेक्सटाइल, फुटवियर और जेम्स-ज्वेलरी को फायदा

टैरिफ घटने का सबसे सीधा फायदा टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को मिलने की उम्मीद है. अमेरिका भारतीय रेडीमेड गारमेंट्स और होम टेक्सटाइल का बड़ा बाजार है. अब कम शुल्क के कारण भारतीय कपड़े अमेरिकी रिटेल स्टोर्स में अपेक्षाकृत सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे, जिससे उनकी मांग बढ़ सकती है.

इसी तरह चमड़ा उद्योग और फुटवियर सेक्टर से जुड़े छोटे और मझोले निर्यातकों को भी राहत मिलेगी. ऊंचे टैरिफ के चलते जिन कंपनियों ने अपनी शिपमेंट कम कर दी थी या रोक दी थी, वे अब दोबारा अमेरिकी बाजार में सक्रिय हो सकती हैं.

जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर, जो पिछले कुछ समय से टैरिफ के दबाव में सुस्त पड़ गया था, उसे भी इस फैसले से नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है. अमेरिका भारतीय हीरे और आभूषणों का एक अहम गंतव्य रहा है, और शुल्क घटने से इस सेक्टर के निर्यात में सुधार की संभावना जताई जा रही है.

समुद्री उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

अमेरिका भारतीय झींगा (श्रिम्प) और फ्रोजन सी-फूड का एक प्रमुख आयातक देश है. ऊंचे टैरिफ के कारण भारतीय समुद्री उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो गए थे, जिससे मांग प्रभावित हुई थी. अब शुल्क घटने से ये उत्पाद वहां के उपभोक्ताओं के लिए अधिक किफायती होंगे.

इससे न केवल झींगा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि समूचे समुद्री खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को फायदा हो सकता है. तटीय राज्यों में मछुआरों और प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए भी यह फैसला आय बढ़ाने वाला साबित हो सकता है.

ऑटो कंपोनेंट्स और स्पेशलिटी केमिकल्स को बूस्ट

टैरिफ राहत का असर इंजीनियरिंग सेक्टर पर भी पड़ने की उम्मीद है. ऑटो कंपोनेंट्स, मशीनरी पार्ट्स और स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे उत्पादों की अमेरिकी कंपनियों में अच्छी मांग रहती है. कम शुल्क के चलते भारतीय सप्लायर्स के लिए ग्लोबल ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) से बड़े ऑर्डर हासिल करना आसान हो सकता है.

इन क्षेत्रों में बेहतर मार्जिन मिलने से कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई तकनीक में निवेश करने के लिए प्रेरित होंगी. इसके अलावा फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पाद जैसे चाय, कॉफी और मसाले भी इस टैरिफ कटौती से लाभान्वित हो सकते हैं, क्योंकि अमेरिकी बाजार में इनकी मांग लगातार बनी रहती है.

निर्यात-उन्मुख सेक्टर्स को मिलेगा फायदा

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ व्यापारिक शुल्क में नरमी से भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी. एक्सपर्ट्स के मुताबिक आईटी सर्विसेज, फार्मास्यूटिकल्स, स्पेशलिटी केमिकल्स, ऑटो एंसिलरीज़ और चुनिंदा इंजीनियरिंग उत्पादों जैसे निर्यात-उन्मुख सेक्टर इस बदलाव से सबसे अधिक लाभ उठा सकते हैं.

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह ट्रेड डील हालिया बजट में तय किए गए उन लक्ष्यों के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क में एक मजबूत कड़ी के रूप में स्थापित करना है.

टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी मिलेगा फायदा

तकनीकी क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस डील से भारत और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी सहयोग और मजबूत होगा. अमेरिकी टेक कंपनियां भारत में अपने क्लाउड सर्विसेज, डेटा सेंटर्स और एआई से जुड़ी सेवाओं का विस्तार भारतीय रीसेलर्स और पार्टनर्स के जरिए करेंगी.

इससे यह आशंका भी कम हुई है कि भारत अपने लिए पूरी तरह अलग टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में बढ़ सकता है. मौजूदा समझ के चलते भारत माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेज़न और डेल जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों के साथ अपने कारोबारी रिश्ते बनाए रखेगा, जिससे आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में स्थिरता बनी रहेगी.

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