ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स और डिजिटल सर्विस प्लेटफॉर्म्स से जुड़े गिग वर्कर्स ने अपनी मांगों को लेकर 3 फरवरी को देशभर में काम बंद रखने का ऐलान किया है. इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स डिलीवरी, कैब सर्विस, साथ ही होम सर्विस प्लेटफॉर्म्स से जुड़े कई सेक्टरों पर असर पड़ने की संभावना है. गिग वर्कर्स का कहना है कि लंबे समय से वे असुरक्षित कार्य परिस्थितियों, कम आय और मनमाने फैसलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है.
हड़ताल का आह्वान करने वाले संगठनों के अनुसार, इस विरोध में केवल डिलीवरी पार्टनर ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े ब्यूटिशियन, स्पा और सैलून वर्कर्स, घरेलू कामकाज से जुड़े कर्मचारी, सफाई कर्मी, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, एसी टेक्नीशियन और कारपेंटर जैसे सर्विस प्रोवाइडर भी शामिल होंगे. इससे शहरी इलाकों में रोजमर्रा की ऑनलाइन सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, पहले भी हो चुकी है हड़ताल
Gig & Platform Service Workers Union (GIPSWU) के बैनर तले सैकड़ों गिग वर्कर्स दोपहर 1 बजे दिल्ली के जंतर-मंतर पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन करेंगे. यूनियन का कहना है कि इससे पहले 26 जनवरी और उससे पहले भी गिग वर्कर्स ने विरोध और काम बंद किया था, लेकिन कंपनियों और सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया. इसी वजह से अब एक बार फिर राष्ट्रव्यापी स्तर पर दबाव बनाने का फैसला लिया गया है.
वर्कर्स का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर लाखों लोगों की रोजी-रोटी इन्हीं ऐप्स से चलती है, लेकिन उनके पास किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा, स्थिर आय या कानूनी संरक्षण नहीं है. यही कारण है कि वे अपनी मांगों को लेकर अब सड़क पर उतरने को मजबूर हैं.
आरोप: मनमानी, अस्थिर आय और अपारदर्शी सिस्टम
GIPSWU ने प्लेटफॉर्म कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. यूनियन के मुताबिक, गिग वर्कर्स को बिना किसी स्पष्ट कारण के उनकी आईडी ब्लॉक कर दी जाती है, जिससे वे तुरंत काम से बाहर हो जाते हैं. इसके अलावा, रेटिंग सिस्टम और काम के आवंटन की प्रक्रिया को अपारदर्शी बताया गया है, जिससे वर्कर्स को यह समझ ही नहीं आता कि किस आधार पर उन्हें कम या ज्यादा काम मिल रहा है.
यूनियन का कहना है कि आय अस्थिर बनी हुई है और कंपनियां समय-समय पर अपनी नीतियों में एकतरफा बदलाव कर देती हैं, जिसका सीधा असर वर्कर्स की कमाई पर पड़ता है. कई बार इंसेंटिव स्कीम और भुगतान दरों में बदलाव बिना किसी पूर्व सूचना के लागू कर दिए जाते हैं, जिससे गिग वर्कर्स की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाती है.
महिला गिग वर्कर्स को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है. यूनियन का आरोप है कि जब महिलाएं अपने वेतन, सुरक्षा या कार्य परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाती हैं, तो उन्हें कथित तौर पर परेशान किया जाता है. कुछ मामलों में हिंसा तक की शिकायतें सामने आने की बात कही गई है. इसके बाद उनकी आईडी निष्क्रिय कर दी जाती है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा संकट खड़ा हो जाता है.
गिग वर्कर्स की प्रमुख मांगें
GIPSWU की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह के मुताबिक, यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार से कई बार संपर्क किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. यूनियन की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
यूनियन का कहना है कि मौजूदा समय में गिग वर्कर्स को कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता, जिससे वे श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली कई बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा कवच से वंचित रह जाते हैं.
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