सिलीगुड़ी से वाराणसी तक हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन, 3 घंटे से भी कम समय में पूरी होगी यात्रा, देखें रूट

केंद्र सरकार ने देश के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.

High-speed bullet train from Siliguri to Varanasi Budget 2026
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

केंद्र सरकार ने देश के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बजट 2026-27 के दौरान सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई, जिनमें वाराणसी से सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भी शामिल है. इस परियोजना को पूर्वी भारत और नॉर्थ-ईस्ट को बेहतर कनेक्टिविटी देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

बजट पेश करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देशभर में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की रूपरेखा रखी थी. इसके बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि वाराणसी–पटना–सिलीगुड़ी रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने बताया कि यह पश्चिम बंगाल को मिलने वाली पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन होगी. भविष्य में इस कॉरिडोर को गुवाहाटी तक विस्तारित करने की योजना भी है, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों को तेज़ रेल सेवा से जोड़ा जा सकेगा.

3 घंटे से भी कम समय में सिलीगुड़ी तक सफर

रेल मंत्री के मुताबिक, वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक की दूरी बुलेट ट्रेन के जरिए लगभग 2 घंटे 55 मिनट में तय की जा सकेगी. फिलहाल इसी रूट पर सामान्य ट्रेनों से यात्रा में कई घंटे लगते हैं. इस नई हाई-स्पीड सेवा से व्यापार, पर्यटन और लोगों की आवाजाही में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है. उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहरों के बीच तेज़ और आधुनिक रेल संपर्क से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है.

रेलवे बजट में अब तक का सबसे बड़ा आवंटन

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रेलवे मंत्रालय को 2 लाख 78 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 10.8 प्रतिशत अधिक है. वहीं, रेलवे के लिए कुल पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) 2 लाख 93 हजार 30 करोड़ रुपये रखा गया है, जो अब तक का सर्वाधिक बताया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इस बजट का उद्देश्य नए ट्रैक, आधुनिक ट्रेनों, हाई-स्पीड कॉरिडोर और माल ढुलाई नेटवर्क को मजबूत करना है.

पश्चिम बंगाल को कितना मिला?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल के लिए इस बजट में करीब 14 हजार 205 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. यह राशि राज्य में रेलवे से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों, नए प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर खर्च की जाएगी. उनके मुताबिक, सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो राज्य को राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ेगा.

नया फ्रेट कॉरिडोर: दानकुनी से सूरत तक

बजट में माल ढुलाई के लिए भी एक नए कमोडिटी फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है. वित्त मंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल के दानकुनी और गुजरात के सूरत के बीच नया फ्रेट कॉरिडोर विकसित किया जाएगा. बाद में रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कॉरिडोर गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होते हुए दानकुनी तक जाएगा. इससे औद्योगिक क्षेत्रों को तेज़ और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.

कोलकाता मेट्रो विस्तार और चिंगरीघाटा विवाद

कोलकाता मेट्रो के विस्तार को लेकर भी रेल मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि पहले 40 वर्षों में कोलकाता मेट्रो नेटवर्क का विस्तार करीब 27 किलोमीटर तक हुआ था, जबकि 2014 के बाद बीते 11 वर्षों में इसमें लगभग 45 किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है. उनका दावा है कि मेट्रो के तेज़ विकास की क्षमता है, लेकिन कुछ स्थानों पर स्थानीय स्तर पर अड़चनें सामने आ रही हैं.

विशेष रूप से चिंगरीघाटा क्षेत्र में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर विवाद का जिक्र किया गया. रेल मंत्री के अनुसार, हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बावजूद वहां निर्माण कार्य में प्रशासनिक सहयोग की कमी बताई जा रही है. निर्माण एजेंसी का दावा है कि करीब 366 मीटर सड़क के हिस्से में ट्रैफिक नियंत्रण और अनुमति संबंधी दिक्कतों के कारण ऑरेंज लाइन के काम में देरी हो रही है. यही वजह है कि न्यू गरिया से बेलेघाटा तक मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है, लेकिन एयरपोर्ट तक पूरी तरह निर्बाध कनेक्टिविटी अभी तय समय पर शुरू नहीं हो पाई है.

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