Hindu In Pakistan: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक मौलवी के भारत समर्थक बयान ने देशभर में सनसनी मचा दी है. मर्दान जिले के रहने वाले मौलवी गुलजार को सेना और खुफिया एजेंसियों के खिलाफ खुलकर बोलने और भारत का समर्थन करने की बात कहने के बाद पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार कर लिया है.
गुलजार ने एक जनसभा के दौरान पाकिस्तान की सेना पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि “हिंदुओं ने हमें उतनी क्रूरता से नहीं रखा, जितना पाकिस्तानी सैनिकों ने जेल में रखा. अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करता है, तो हम भारत का साथ देंगे.” उनके इस बयान के बाद स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियां हरकत में आ गईं और उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया.
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— Kreately.in (@KreatelyMedia) October 21, 2025
Pakistani Maulvi says:
-Was detained by the Pakistani Army/ISI
-Many other Mullas imprisoned as well
-We were tortured everyday
-Hence we prayed to Allah, bring Hindu rule to Pakistan to free us from Paki Army
🇵🇰pic.twitter.com/dC6fEYhWc7
सेना और खुफिया एजेंसियों पर खुला हमला
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मौलवी गुलजार ने अपने भाषण में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई जैसे खुफिया संगठनों पर अत्याचार और धार्मिक नेताओं के उत्पीड़न का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि जेलों में बंद कई उलेमा और मदरसा छात्रों ने कुरान की कसम खाकर कहा कि अगर कभी भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है, तो वे भारत का समर्थन करेंगे.
गुलजार ने अपने भाषण में कहा, “पाकिस्तानी सेना ने हमारे साथ जितनी बेरहमी से पेश आया है, उतनी किसी गैर-मुस्लिम या भारतीय सैनिक ने भी नहीं की. भारतीय सेना, पाकिस्तानी सेना से कहीं अधिक इंसानियत दिखाती है.” इस बयान ने पाकिस्तान की सियासत और सुरक्षा प्रतिष्ठान में भूचाल ला दिया है.
खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ता असंतोष
यह घटना उस समय सामने आई है जब पाकिस्तान के जनजातीय इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में राज्य के खिलाफ असंतोष तेजी से बढ़ रहा है. खैबर पख्तूनख्वा, उत्तरी वज़ीरिस्तान और स्वात घाटी जैसे इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य चरमपंथी गुटों की मौजूदगी पहले से ही सेना के लिए चुनौती बनी हुई है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सेना और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाईयों में आम नागरिकों को निशाना बनाया जाता है. कई इलाकों में लोगों ने ‘फ्री पख्तूनख्वा’ और ‘नो आर्मी जोन’ जैसे नारे लगाने शुरू कर दिए हैं. मौलवी गुलजार का बयान इसी पृष्ठभूमि में आया है, जो यह दिखाता है कि अब धार्मिक समुदाय के भीतर भी सेना के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है.
विश्लेषकों के मुताबिक बड़ा संकेत
राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मौलवी गुलजार का बयान सिर्फ एक व्यक्ति की राय नहीं बल्कि पाकिस्तान की जनता में पनप रही गहरी नाराजगी का संकेत है. जिस तरह से धार्मिक नेता भी अब खुलकर सेना की आलोचना कर रहे हैं, वह देश की एकता और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है.
इस्लामाबाद स्थित राजनीतिक विश्लेषक रज़ा कुरैशी का कहना है, “सेना हमेशा पाकिस्तान की राजनीति और नीतियों पर हावी रही है. लेकिन अब पहली बार निचले स्तर पर धार्मिक और सामाजिक तबके खुलकर विरोध में बोलने लगे हैं. यह पाकिस्तान के भीतर गहरे संकट की ओर इशारा करता है.”
सेना की साख पर असर
बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तान की सेना की साख में लगातार गिरावट आई है. देश में बढ़ती महंगाई, राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार के आरोपों ने सेना की पकड़ को कमजोर किया है. इसके अलावा, आईएसआई की नीतियों को लेकर भी आम जनता में असंतोष देखा जा रहा है.
अब जब मौलवी जैसे प्रभावशाली धार्मिक नेता भारत के प्रति नरम रुख दिखाने लगे हैं, तो यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आंतरिक चुनौती बन सकती है.
भविष्य के लिए खतरे की घंटी
खैबर पख्तूनख्वा में मौलवी गुलजार की गिरफ्तारी केवल एक स्थानीय घटना नहीं बल्कि पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता और सेना के घटते प्रभाव की कहानी बयां करती है. यह उस दिशा की ओर इशारा करता है, जहां आम नागरिकों और धार्मिक नेताओं का भरोसा सेना से उठता जा रहा है.
अगर स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह असंतोष भविष्य में गृह संघर्ष या बड़े पैमाने पर विद्रोह का रूप ले सकता है. विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान को अब अपनी नीतियों और सेना की भूमिका पर पुनर्विचार करना होगा, वरना देश के कई हिस्से उसकी पकड़ से पूरी तरह बाहर हो सकते हैं.
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