भारत ने दिखाई आंख तो बांग्लादेश की हेकड़ी बंद, चीन-पाकिस्तान के साथ बैठक पर देने लगा सफाई

शेख हसीना सरकार के पतन के बाद जबसे नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की बागडोर संभाली है, देश की विदेश नीति में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले हैं.

When India showed its anger Bangladesh stopped being arrogant
यूनुस | Photo: ANI

शेख हसीना सरकार के पतन के बाद जबसे नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की बागडोर संभाली है, देश की विदेश नीति में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले हैं. भारत के साथ पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों में खटास आई है, जबकि चीन और पाकिस्तान के साथ रिश्तों में गर्मजोशी बढ़ी है. लेकिन अब ढाका को एहसास हो रहा है कि नई दिशा में गया यह रुख उसे मुश्किल में डाल सकता है.

भारत के साथ संबंध सुधारने की इसी कोशिश के तहत, गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने चीन और पाकिस्तान के साथ किसी भी रणनीतिक गठबंधन की संभावना को साफ शब्दों में नकार दिया.

“हम किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं” – बांग्लादेश की सफाई

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तौहीद हुसैन ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, “हम कोई गठबंधन नहीं बना रहे हैं. यह एक औपचारिक बैठक थी, न कि कोई राजनीतिक समझौता.” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की बैठकों का उद्देश्य भारत को दरकिनार करना नहीं है. “मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि यह किसी तीसरे देश को लक्षित करके नहीं किया गया,” उन्होंने कहा.

कुनमिंग बैठक पर उठे सवाल

19 जून को चीन के कुनमिंग में आयोजित 9वीं चीन-दक्षिण एशिया प्रदर्शनी और 6वीं सहयोग बैठक के मौके पर बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान की एक अनौपचारिक त्रिपक्षीय बैठक हुई थी. चीन की ओर से इसे 'त्रिपक्षीय सहयोग पर चर्चा' बताया गया, जबकि पाकिस्तान ने इसे ‘बांग्लादेश-चीन-पाकिस्तान त्रिपक्षीय तंत्र की पहली बैठक’ करार दिया.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तौहीद हुसैन ने कहा, “इसमें कुछ भी छिपा नहीं था और न ही इसे बहुत बड़ी बात बनाना चाहिए. चर्चा मुख्यतः क्षेत्रीय संपर्क और विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित थी.”

भारत के साथ रिश्ते ‘पुनर्समायोजन’ की ओर

बातचीत के दौरान हुसैन ने यह भी स्वीकार किया कि भारत और बांग्लादेश के संबंध वर्तमान में ‘पुनर्समायोजन’ के चरण में हैं. “हमें यथार्थ को स्वीकार करना चाहिए. भारत और पिछली सरकार के संबंध बेहद घनिष्ठ थे. वर्तमान संबंध उस स्तर के नहीं हैं, लेकिन हम सुधार की दिशा में ईमानदारी से काम कर रहे हैं,” उन्होंने कहा.

ये भी पढ़ेंः क्या पुतिन ने दिया भारत को धोखा? SCO बैठक में आतंकवाद मुद्दे पर रूस की चुप्पी से उठे सवाल