भारत के लिए सेना का वेस्टर्न कमांड क्यों है खास? ट्रंप के खास सर्जियो गोर करेंगे दौरा; जानें इसके मायने

Western Command Visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सर्जियो गोर के भारत दौरे के बाद भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. ट्रेड डील को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाने वाले गोर अब भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड मुख्यालय पहुंच गए हैं.

Western Command of the Army special for India Trump special man Sergio Gore will visit
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Western Command Visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सर्जियो गोर के भारत दौरे के बाद भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. ट्रेड डील को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाने वाले गोर अब भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड मुख्यालय पहुंच गए हैं. उन्होंने चंडीगढ़ पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर खुद इसकी जानकारी दी.

उनके इस दौरे के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि एक विदेशी राजनयिक सेना के ऑपरेशनल कमांड मुख्यालय क्यों गया. कुछ लोगों ने इसे संभावित रक्षा सौदों, खासकर F-35 फाइटर जेट से जोड़कर देखा.

क्या है वेस्टर्न कमांड की अहमियत?

वेस्टर्न कमांड का मुख्यालय चंडीमंदिर (चंडीगढ़ के पास) में है. इसे भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण कमांड में गिना जाता है. यह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और जम्मू के कुछ हिस्सों की सुरक्षा संभालती है. राष्ट्रीय सुरक्षा में इसकी भूमिका अहम होने के कारण इसे सेना की मजबूत ढाल माना जाता है.

इस कमांड का मुख्य फोकस पाकिस्तान सीमा पर रहता है. अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी इसी के पास है. चीन के साथ तनाव बढ़ने के बाद उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में भी इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है. जरूरत पड़ने पर यह दो मोर्चों की स्थिति से निपटने में भी अहम मानी जाती है.

युद्धों में रही अहम भूमिका

1947, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में वेस्टर्न कमांड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 1971 के युद्ध में पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने में इसकी बड़ी भूमिका रही. कारगिल संघर्ष के दौरान भी इसके क्षेत्र में भारी सैन्य आवाजाही और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सुनिश्चित किया गया था.

क्या विदेशी दूत का सैन्य मुख्यालय जाना सामान्य है?

आमतौर पर विदेशी राजदूत रक्षा मंत्रालय या सरकारी स्तर पर बैठकों में शामिल होते हैं. लेकिन किसी सक्रिय ऑपरेशनल कमांड मुख्यालय का दौरा करना असामान्य माना जाता है. इसे भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का संकेत माना जा रहा है.

F-35 और Su-57 की चर्चा क्यों?

सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी है कि अमेरिका भारत को अपना आधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट ऑफर कर सकता है. भारत इस समय अपनी वायुसेना के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की तलाश में है. दूसरी ओर रूस के Su-57 को लेकर भी अटकलें हैं कि भारत उसमें दिलचस्पी दिखा सकता है.

कुछ लोगों का मानना है कि अमेरिका चाहता है कि भारत रूस पर अपनी रक्षा निर्भरता कम करे. हालांकि भारत की विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित है और रक्षा खरीद राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर की जाती है.

चीन और पाकिस्तान को संदेश?

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह का दौरा केवल औपचारिक नहीं होता. चंडीमंदिर जैसे संवेदनशील सैन्य मुख्यालय में अमेरिकी प्रतिनिधि की मौजूदगी यह दिखाती है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग गहरा रहा है. इसे चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में भी एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

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