मंदिर, मस्जिद, चर्च... हर धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव! अब सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और उनसे जुड़े भेदभाव के मामलों की सुनवाई के लिए 9 जजों की संविधान पीठ गठित की जाएगी.

Supreme Court discrimination against women at religious places
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और उनसे जुड़े भेदभाव के मामलों की सुनवाई के लिए 9 जजों की संविधान पीठ गठित की जाएगी. यह बेंच 7 अप्रैल 2026 से अंतिम सुनवाई शुरू करेगी. इस सुनवाई में केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े फैसले की समीक्षा याचिका भी शामिल है.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने स्पष्ट किया कि भारत के चीफ जस्टिस 9 सदस्यीय संविधान पीठ का गठन करेंगे. अदालत ने सभी पक्षों को 14 मार्च या उससे पहले अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है.

सबरीमाला समीक्षा याचिका पर भी होगी सुनवाई

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से कहा कि सरकार ने सबरीमाला फैसले की समीक्षा के लिए दायर याचिका का समर्थन किया है. पहले दिए गए फैसले में केरल के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित पवित्र सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई थी. अब इसी फैसले की समीक्षा पर 9 जजों की बेंच विचार करेगी.

दोनों पक्षों के लिए नोडल काउंसल नियुक्त

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला फैसले की समीक्षा का समर्थन करने वाले सभी पक्षों के लिए वकील कृष्णा कुमार सिंह को नोडल काउंसल नियुक्त किया है. वहीं, इस फैसले की समीक्षा का विरोध करने वाले पक्षों के लिए शाश्वती परी को नोडल काउंसल बनाया गया है.

इसके अलावा वरिष्ठ वकील के. परमेश्वर के साथ शिवम सिंह को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है. शिवम सिंह सभी पक्षों की ओर से लिए गए रुख को अदालत के सामने पेश करेंगे. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तय समय-सारणी का पालन सभी पक्षों को करना होगा.

22 अप्रैल तक सुनवाई पूरी होने की संभावना

अदालत के आदेश के अनुसार 7 अप्रैल 2026 को सुबह 10:30 बजे 9 जजों की बेंच सुनवाई शुरू करेगी. 7 से 9 अप्रैल तक समीक्षा याचिकाकर्ताओं और उनका समर्थन करने वालों की दलीलें सुनी जाएंगी. इसके बाद 14 से 16 अप्रैल तक समीक्षा का विरोध करने वाले पक्षों की सुनवाई होगी. अदालत ने उम्मीद जताई है कि 22 अप्रैल तक अंतिम सुनवाई पूरी कर ली जाएगी.

अन्य धार्मिक प्रथाओं पर भी होगा विचार

सबरीमाला के अलावा संविधान पीठ मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों और दरगाहों में प्रवेश के मुद्दे, गैर-पारसी पुरुष से विवाह करने वाली पारसी महिलाओं को अगियारी (अग्नि मंदिर) में प्रवेश से रोकने की परंपरा और दावूदी बोहरा समुदाय में फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन जैसी प्रथाओं पर भी सुनवाई करेगी.

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