अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात ऐसे हैं कि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज हो गई है. जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख और सख्त हो गया है. अब उनका पूरा फोकस ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई पर है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाता रहा तो उसे इसका कई गुना बड़ा जवाब मिलेगा.
अमेरिकी सेना लगातार ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमले कर रही है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपने सैनिकों की मौत का जवाब जरूर देगा.
जॉर्डन हमले के बाद बढ़ा तनाव
अमेरिकी रक्षा विभाग ने पुष्टि की है कि जॉर्डन के मुवाफक सालती एयर बेस पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई. इनमें फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहन और प्राइवेट इसाबेला गोंजालेज शामिल हैं.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. इसके बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज कर दी है.
पेंटागन पर क्यों उठ रहे सवाल?
अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन पर भी सवाल उठ रहे हैं. पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल के अनुसार, 7 जुलाई 2026 से अब तक करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं. इनमें से ज्यादातर को मामूली चोटें आईं और अधिकांश सैनिक फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं.
हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सैनिकों के घायल होने की जानकारी समय पर सार्वजनिक नहीं की गई. इसी वजह से पेंटागन की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.
मध्य पूर्व में बढ़ रही अमेरिकी ताकत
अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इलाके में अतिरिक्त लड़ाकू विमान और ईंधन भरने वाले विमान तैनात किए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका किसी भी नए हमले का जवाब देने के लिए पूरी तैयारी में है.
ईरान की तरफ से भी जारी हैं बयान
दूसरी ओर, ईरान के शीर्ष नेताओं की ओर से भी लगातार सख्त बयान दिए जा रहे हैं. दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई बढ़ने से क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है.
आगे क्या हो सकता है?
मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा. अमेरिका अपने सैनिकों पर हुए हमलों का जवाब देने की बात कर रहा है, जबकि ईरान भी पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा.
ऐसे में दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच हालात और कितने गंभीर होते हैं.