ईरान-यूएस के बीच फिर शुरू होगा युद्ध! सीजफायर की डेडलाइन आगे बढ़ाने से अमेरिका का इंकार

US Iran War: अमेरिका ने साफ कर दिया है कि उसने सीजफायर (युद्धविराम) को बढ़ाने के लिए कोई आधिकारिक अनुरोध नहीं किया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लीविट ने कहा कि इस तरह की खबरें गलत हैं और सच नहीं हैं.

War between Iran and US will start again America refuses to extend ceasefire deadline
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US Iran War: अमेरिका ने साफ कर दिया है कि उसने सीजफायर (युद्धविराम) को बढ़ाने के लिए कोई आधिकारिक अनुरोध नहीं किया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लीविट ने कहा कि इस तरह की खबरें गलत हैं और सच नहीं हैं.

कैरोलिन लीविट ने बताया कि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अमेरिका ने 2 हफ्ते से ज्यादा के लिए सीजफायर बढ़ाने की बात कही है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ने कोई औपचारिक मांग नहीं रखी है.

ईरान पर सख्ती जारी

अमेरिका ने ईरान से जुड़े समुद्री प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू कर दिया है. अब ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर ये नियम लागू होंगे. खासतौर पर अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कड़ी निगरानी रखी जा रही है.

अमेरिकी सेना इस इलाके में मौजूद है और यह सुनिश्चित कर रही है कि जो जहाज ईरान से जुड़े हैं, वे नियमों का पालन करें. वहीं, जो जहाज दूसरे देशों के बंदरगाहों के लिए जा रहे हैं, उन्हें सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है.

बातचीत की उम्मीद अभी भी

लीविट ने यह भी कहा कि अमेरिका को समझौते की उम्मीद है और यह ईरान के हित में है कि वह शर्तों को माने. ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का अगला दौर इस्लामाबाद में हो सकता है. इसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. खबर है कि अगले हफ्ते फिर से बातचीत शुरू हो सकती है. इस बीच पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंच चुका है.

होर्मुज क्षेत्र में सख्ती

ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी नौसेना लगातार गश्त कर रही है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, नाकेबंदी के पहले 48 घंटों में कोई भी जहाज नियम तोड़कर आगे नहीं बढ़ पाया. करीब 9 जहाजों को वापस लौटना पड़ा, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी निर्देशों का पालन किया.

अमेरिकी सेना की तैनाती

इस मिशन में हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के करीब 5,000 नाविक और मरीन इस ऑपरेशन में लगे हुए हैं. उनका काम ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों की निगरानी और रोकथाम करना है.

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