US Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष का अंत अब नजदीक है, लेकिन हाल ही में मिडल ईस्ट में सैनिकों की तैनाती बढ़ाकर उन्होंने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है. अमेरिकी प्रशासन ने इस क्षेत्र में 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को भेजने का फैसला लिया है, जो स्थिति को और संवेदनशील बना सकते हैं.
सैन्य तैनाती में तेजी
पेंटागन के अनुसार, मिडल ईस्ट में करीब 6,000 सैनिकों को USS George H.W. Bush के माध्यम से तैनात किया गया है, जबकि बाकी 4,200 सैनिक बॉक्सर एम्फिबियस रेडी ग्रुप और 11वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के साथ क्षेत्र में पहुंचे हैं. इन सैनिकों के साथ पहले से मौजूद लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिकों को जोड़कर अमेरिकी सैन्य ताकत को मजबूत किया जा रहा है.
साथ ही, एयरक्राफ्ट कैरियर्स की तैनाती भी बढ़ा दी गई है. USS Abraham Lincoln, USS Gerald R. Ford और USS George H.W. Bush को खाड़ी के पास तैनात किया गया है, जो किसी भी समय ऑपरेशन के लिए तैयार हैं. यह कदम उस वक्त उठाया गया है जब Strait of Hormuz में नाकेबंदी को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है और यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है.
संघर्ष के अंत का दावा और स्थिति की अनिश्चितता
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि युद्ध जल्द समाप्त हो जाएगा, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि "अगले दो दिनों में दुनिया कुछ चौंकाने वाली चीजें देखेगी." यह बयान दोनों रुखों की असहमति को दर्शाता है. एक तरफ, ट्रंप कूटनीतिक समाधान की बात कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर सैन्य तैयारियां भी जोरों पर हैं.
क्या अमेरिका की रणनीति प्रभावी होगी?
ट्रंप का यह कदम इस बात का संकेत देता है कि अमेरिका सैन्य टकराव से बचने के लिए कूटनीतिक रास्ते पर भी विचार कर रहा है, लेकिन यदि युद्ध की स्थिति बनी तो अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को पूरी तरह से सक्रिय कर देगा. मिडल ईस्ट की स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है, और यहां शांति की उम्मीद के साथ-साथ बड़े टकराव का खतरा भी लगातार बना हुआ है.
ये भी पढ़ें: 48 घंटे में ही ट्रंप ने लिया यू-टर्न, चीन का नाम लेकर होर्मुज में उठाया बड़ा कदम; पूरी दुनिया होगी प्रभावित