ईरान पर फिर बरसेंगे अमेरिकी बम! ट्रंप ने बुलाई हाईलेवल बैठक, मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ेगी जंग?

US Iran War: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी टकराव अब ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जहां से या तो बड़े सैन्य संघर्ष की शुरुआत हो सकती है या फिर कूटनीति के जरिए हालात को संभाल लिया जाएगा.

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US Iran War: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी टकराव अब ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जहां से या तो बड़े सैन्य संघर्ष की शुरुआत हो सकती है या फिर कूटनीति के जरिए हालात को संभाल लिया जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रविवार को अपने शीर्ष अधिकारियों और सलाहकारों के साथ एक अहम बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें यह तय होगा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जाए या बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ा जाए. दुनिया भर की निगाहें अब व्हाइट हाउस पर टिकी हुई हैं.

ट्रंप के सामने युद्ध और समझौते के बीच दुविधा

डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल बेहद कठिन राजनीतिक और रणनीतिक स्थिति में नजर आ रहे हैं. एक ओर उनका प्रशासन ईरान पर दबाव बनाकर उसे झुकाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध की स्थिति पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर सकती है. ऐसे में ट्रंप दोनों विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों को नहीं मानता है तो सैन्य हमले फिर से शुरू हो सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि बातचीत के जरिए एक “बेहतरीन समझौते” की संभावना अब भी बनी हुई है. ट्रंप ने दावा किया कि हालात पहले से बेहतर हो रहे हैं और दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में प्रगति दिखाई दे रही है.

रविवार को होगी निर्णायक बैठक

रविवार को होने वाली बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है. इस बैठक में ट्रंप अपने करीबी सलाहकारों और वार्ताकारों के साथ ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी इस रणनीतिक बैठक का हिस्सा होंगे.

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अब केवल दो रास्ते बचे हैं. पहला यह कि अमेरिका तेहरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करे और दूसरा यह कि ऐसा समझौता हो जाए जो अमेरिका के हितों के पूरी तरह अनुकूल हो. उनके इस बयान ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे साफ संकेत मिलता है कि व्हाइट हाउस किसी भी बड़े कदम के लिए तैयार है.

“50-50” की स्थिति में खड़े हैं हालात

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि फिलहाल दोनों संभावनाएं बराबर हैं. उन्होंने कहा कि यह 50-50 की स्थिति है कि या तो एक अच्छा समझौता होगा या फिर ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह केवल उसी डील को स्वीकार करेंगे जिसमें अमेरिका की सभी प्रमुख मांगें पूरी हों. उनका यह बयान बताता है कि अमेरिका किसी भी नरमी के मूड में नहीं है और वह ईरान पर अधिकतम दबाव बनाए रखना चाहता है.

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक अहम मध्यस्थ के रूप में सामने आया है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर शनिवार को ईरान पहुंचे, जहां उन्होंने तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं. पाकिस्तानी सेना ने इन बैठकों को “सार्थक” बताया है.

पाकिस्तान का कहना है कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में सकारात्मक प्रगति हुई है और अंतिम सहमति की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है.

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान पिछले कई हफ्तों से दोनों देशों के बीच संवाद कायम रखने की कोशिश कर रहा है ताकि युद्ध जैसी स्थिति को टाला जा सके. लेकिन परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर दोनों पक्ष अब भी एकमत नहीं हो पाए हैं.

अप्रैल में हुआ था अस्थायी समझौता

ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसके बाद उम्मीद जगी थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा. इसके बाद मध्यस्थों ने लगातार कोशिशें कीं कि किसी स्थायी समझौते तक पहुंचा जा सके.

हालांकि बातचीत के कई दौर के बावजूद अब तक अंतिम सहमति नहीं बन पाई है. ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय रणनीति को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिख रहा, जबकि अमेरिका चाहता है कि तेहरान उसकी सभी प्रमुख शर्तों को माने.

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