स्वदेशी सुसाइड ड्रोन 'वायु अस्त्र-1' का सफल परीक्षण, दुश्मन के ठिकाने होंगे तबाह, जानें ताकत और खासियत

भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में भारतीय रक्षा क्षेत्र को बड़ी सफलता मिली है. पुणे की रक्षा कंपनी NIBE ने स्वदेशी लोटरिंग म्यूनिशन ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है.

Successful testing of indigenous suicide drone Vayu Astra-1 In Pokhran
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Vayu Astra-1: भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में भारतीय रक्षा क्षेत्र को बड़ी सफलता मिली है. पुणे की रक्षा कंपनी NIBE ने स्वदेशी लोटरिंग म्यूनिशन ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है. यह अत्याधुनिक कामिकाजी या सुसाइड ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी से बेहद सटीक हमला करने में सक्षम माना जा रहा है.

कंपनी के मुताबिक, राजस्थान के पोखरण और उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र के मलारी इलाके में हुए परीक्षणों के दौरान ‘वायु अस्त्र-1’ ने शानदार प्रदर्शन किया. इस ड्रोन ने लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को पहली ही कोशिश में बेहद सटीकता के साथ निशाना बनाकर अपनी क्षमता साबित की.

पोखरण ट्रायल में दिखी घातक मारक क्षमता

राजस्थान के पोखरण में 18 और 19 अप्रैल को एनसीएनसी (नो-कॉस्ट, नो-कमिटमेंट) ट्रायल आयोजित किया गया था. इस दौरान ‘वायु अस्त्र-1’ को 10 किलोग्राम वॉरहेड के साथ परीक्षण के लिए इस्तेमाल किया गया.

कंपनी का दावा है कि ड्रोन ने लक्ष्य पर 1 मीटर से भी कम सीईपी (सर्कुलर एरर प्रोबेबल) के साथ हमला किया. इसका मतलब है कि यह प्रणाली बेहद उच्च स्तर की सटीकता से निशाना साध सकती है.

ट्रायल के दौरान ‘अबॉर्ट अटैक’ और ‘री-अटैक’ जैसी क्षमताओं का भी सफल प्रदर्शन किया गया. यानी अगर मिशन के दौरान लक्ष्य बदल जाए या हमला रोकने की जरूरत पड़े, तो ड्रोन वापस लौट सकता है या दोबारा हमला करने के लिए तैयार हो सकता है.

पहाड़ों में भी सफल रहा परीक्षण

इसके बाद 26 और 27 अप्रैल को उत्तराखंड के जोशीमठ (मलारी) क्षेत्र में हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल किया गया. करीब 14 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले इलाके में ‘वायु अस्त्र-1’ ने 90 मिनट से ज्यादा समय तक उड़ान भरते हुए मिशन पूरा किया.

इतनी ऊंचाई पर लंबे समय तक ऑपरेशन करना किसी भी ड्रोन के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है. लेकिन परीक्षण के दौरान सिस्टम ने न सिर्फ सफल उड़ान भरी, बल्कि मिशन समाप्त होने के बाद रिकवरी क्षमता भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित की.

क्या है ‘वायु अस्त्र-1’?

‘वायु अस्त्र-1’ एक लोटरिंग म्यूनिशन सिस्टम है. आम भाषा में इसे ‘सुसाइड ड्रोन’ या ‘कामिकाजी ड्रोन’ भी कहा जाता है. इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि यह लक्ष्य के ऊपर कुछ समय तक मंडराता रहे और सही समय मिलने पर खुद को लक्ष्य से टकराकर विस्फोट कर दे.

यह तकनीक आधुनिक युद्ध में बेहद प्रभावी मानी जाती है क्योंकि इससे दुश्मन के बंकर, टैंक, सैन्य वाहन और सैनिक ठिकानों पर सटीक हमला किया जा सकता है.

दिन-रात दोनों समय कर सकता है हमला

‘वायु अस्त्र-1’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुउद्देश्यीय क्षमता मानी जा रही है. यह ड्रोन दिन और रात दोनों समय ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है.

इसके अलावा यह दुश्मन के इलाके के ऊपर उड़ते हुए निगरानी भी कर सकता है और सही लक्ष्य मिलने पर तुरंत हमला कर सकता है. जरूरत पड़ने पर मिशन रद्द करने और दोबारा हमला करने की क्षमता भी इसे और घातक बनाती है.

पहाड़ी इलाकों में भी कारगर

भारतीय सेना के लिए यह सिस्टम खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे पहाड़ी और हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है.

भारत की उत्तरी सीमाओं पर मौजूद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे ड्रोन सेना की ताकत को और बढ़ा सकते हैं. ऊंचे इलाकों में लंबी उड़ान और सटीक हमले की क्षमता इसे भविष्य की लड़ाइयों के लिए अहम हथियार बना सकती है.

इजरायली तकनीक से प्रेरित

कंपनी के अनुसार, ‘वायु अस्त्र-1’ का विकास इजरायली तकनीक से प्रेरित होकर किया गया है. इजरायल लंबे समय से लोटरिंग म्यूनिशन तकनीक में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल रहा है.

अब भारत भी स्वदेशी तकनीक के जरिए इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सिस्टम भारतीय सेना की स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत करेंगे.

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