नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा न केवल वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इस दौरान अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (National Security Strategy) को भी सार्वजनिक किया है. इस नीति में भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है और चीन के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया गया है. खासकर दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत और जापान जैसे देशों के साथ सहयोग की आवश्यकता को महसूस किया गया है.
भारत को प्राथमिकता, चीन के खिलाफ सहयोग की बात
अमेरिका की ओर से जारी इस नई रणनीति में, भारत के साथ रिश्तों को और भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने का उल्लेख किया गया है. भारत को एक अहम सहयोगी के तौर पर देखा गया है, खासकर तब जब चीन का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण चीन सागर में चीन की नीतियों का मुकाबला करने के लिए वह भारत और जापान जैसे देशों के साथ सामूहिक रूप से कदम उठाएगा, न कि अकेले.
यूरोपीय देशों पर निशाना: ट्रंप का संदेश
ट्रंप प्रशासन ने अपनी सुरक्षा नीति में यूरोपीय देशों पर भी तीखा प्रहार किया है. रणनीति में यह कहा गया कि यूरोपीय देश अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को खतरे में डाल रहे हैं और यूक्रेन युद्ध के समाधान में अमेरिकी प्रयासों को विफल कर रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों का यह मानना है कि यूक्रेन संकट के समाधान के लिए यूरोपीय देशों की भूमिका को फिर से समझने की जरूरत है, क्योंकि यह युद्ध वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बन चुका है.
'बर्डन-शिफ्टिंग' नीति
अमेरिका ने अपनी रणनीति में एक नई नीति को पेश किया है, जिसे 'बर्डन-शिफ्टिंग' कहा गया है. इसके तहत यूरोप को अपने पैरों पर खड़ा करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि उसे अमेरिकी समर्थन पर कम निर्भर रहना पड़े. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यूरोपीय देशों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें सैन्य और आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाना होगा. इसके साथ ही, अमेरिका अपनी सैन्य उपस्थिति को पुनः समायोजित करेगा ताकि वैश्विक खतरों का प्रभावी तरीके से मुकाबला किया जा सके.
चीन को आर्थिक चुनौती के रूप में पेश किया गया
नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी में चीन को अमेरिका के लिए सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती के रूप में चित्रित किया गया है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका अब चीन के साथ अपनी आर्थिक नीतियों को फिर से संतुलित करेगा और अमेरिका की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए पारस्परिकता और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जाएगी. साथ ही, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अमेरिका निरंतर उपायों पर ध्यान केंद्रित करेगा.
भारत और चीन के साथ अमेरिका का रणनीतिक संतुलन
इस नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति से यह साफ है कि अमेरिका न केवल अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ रिश्तों को मजबूत करना चाहता है, बल्कि भारत जैसे उभरते शक्तिशाली देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को भी प्राथमिकता दे रहा है. वहीं, चीन की बढ़ती ताकत और उसकी आक्रामक नीतियों के खिलाफ भारत को अपने अहम साझेदार के रूप में देखा जा रहा है.
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