5 महीने की जंग ने खोली अमेरिका की पोल! खत्म होने की कगार पर हाईटेक मिसाइलों का भंडार?

US-Iran War: ईरान के साथ कई महीनों तक चले संघर्ष ने अमेरिका की सैन्य शक्ति को लेकर दुनिया की सोच में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है. अब चर्चा सिर्फ इस बात की नहीं है कि अमेरिका के पास कितने आधुनिक हथियार हैं, बल्कि इस पर भी है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में वह अपने हथियारों की आपूर्ति कितनी तेजी से बनाए रख सकता है.

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US-Iran War: ईरान के साथ कई महीनों तक चले संघर्ष ने अमेरिका की सैन्य शक्ति को लेकर दुनिया की सोच में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है. अब चर्चा सिर्फ इस बात की नहीं है कि अमेरिका के पास कितने आधुनिक हथियार हैं, बल्कि इस पर भी है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में वह अपने हथियारों की आपूर्ति कितनी तेजी से बनाए रख सकता है. लगातार मिसाइलों के इस्तेमाल ने यह संकेत दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल तकनीकी बढ़त का नहीं, बल्कि मजबूत रक्षा उत्पादन क्षमता और टिकाऊ सैन्य भंडार का भी इम्तिहान होता है.

लंबी लड़ाई में तेजी से घटा प्रिसिजन मिसाइलों का भंडार

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इस युद्ध में ATACMS और नई पीढ़ी की Precision Strike Missile (PrSM) जैसी लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया. शुरुआती अनुमान था कि संघर्ष जल्द समाप्त हो जाएगा, लेकिन युद्ध के लंबा खिंचने से इन हाई-प्रिसिजन हथियारों की मांग लगातार बढ़ती गई. बताया जा रहा है कि सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इन मिसाइलों का लगभग पूरा स्टॉक इस्तेमाल हो गया, जिसके बाद दूसरे सैन्य ठिकानों से हथियारों की आपूर्ति करनी पड़ी.

व्हाइट हाउस ने जताया भरोसा, विशेषज्ञों की चिंता बरकरार

अमेरिकी प्रशासन ने हथियारों की कमी की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि देश के पास अभी भी दुनिया के किसी भी अन्य राष्ट्र से अधिक सैन्य क्षमता मौजूद है. व्हाइट हाउस का दावा है कि रक्षा कंपनियां रिकॉर्ड स्तर पर उत्पादन बढ़ा रही हैं, जबकि पेंटागन ने भी भरोसा दिलाया कि अमेरिकी सेना अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है. हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि महंगी और अत्याधुनिक मिसाइलों का उत्पादन सीमित गति से होने के कारण भंडार को पहले जैसी स्थिति में पहुंचाने में समय लग सकता है.

रक्षात्मक हथियारों पर भी पड़ा दबाव

रक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञों और CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के दौरान केवल हमला करने वाली मिसाइलें ही नहीं, बल्कि पैट्रियट और THAAD जैसे अत्याधुनिक इंटरसेप्टर सिस्टम का भी भारी मात्रा में इस्तेमाल हुआ. इसके अलावा अमेरिकी नौसेना ने टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का भी बड़ा हिस्सा दागा. इससे यह स्पष्ट हुआ कि आधुनिक युद्ध में रक्षा और आक्रमण दोनों के लिए अत्याधुनिक हथियारों की लगातार उपलब्धता बेहद जरूरी होती है और लंबा संघर्ष किसी भी देश के सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव डाल सकता है.

उत्पादन क्षमता होगी सबसे बड़ी ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में अमेरिका को चीन या रूस जैसी बड़ी सैन्य शक्तियों के साथ किसी लंबे संघर्ष का सामना करना पड़ा, तो केवल अत्याधुनिक हथियार होना पर्याप्त नहीं होगा. निर्णायक भूमिका इस बात की होगी कि रक्षा उद्योग कितनी तेजी से नए हथियार तैयार कर सकता है और सेना तक उनकी आपूर्ति बनाए रख सकता है. यही वजह है कि अमेरिका अब मिसाइल उत्पादन बढ़ाने, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और अपने रणनीतिक भंडार को फिर से भरने पर विशेष जोर दे रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी बड़े सैन्य मोर्चे पर उसकी तैयारी कमजोर न पड़े.

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