1332 लोगों की मौत, 3643 संपत्तियां नष्ट... ईरान पर हमले का सातवां दिन, पश्चिम एशिया में गहराया संकट

Middle East Conflict: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के सातवें दिन की घटनाएं एक भयंकर मोड़ पर पहुंच गई हैं. युद्ध की तीव्रता में भारी वृद्धि हुई है, और इस संघर्ष ने अब एक आक्रामक और विनाशकारी चरण में प्रवेश कर लिया है.

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Middle East Conflict: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के सातवें दिन की घटनाएं एक भयंकर मोड़ पर पहुंच गई हैं. युद्ध की तीव्रता में भारी वृद्धि हुई है, और इस संघर्ष ने अब एक आक्रामक और विनाशकारी चरण में प्रवेश कर लिया है. यह सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक संपत्तियां भी निशाने पर हैं. अब सवाल यह उठता है कि यह संघर्ष न केवल ईरान के लिए, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र के लिए कितने खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. 

ईरान में जमीनी हालात

ईरान के भीतर युद्ध के सातवें दिन की स्थिति बेहद गंभीर है. राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में हवाई हमलों की तीव्रता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है. तेहरान विश्वविद्यालय के आसपास और शहर के आवासीय इलाकों में भारी विस्फोटों की खबरें आ रही हैं. विशेष रूप से, तेहरान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में बमबारी ने पहले से ज्यादा तबाही मचाई है. शिराज, इस्फ़हान और करमनशाह जैसे प्रमुख इलाकों में भी लगातार विस्फोट हो रहे हैं, जिनमें कई लोग मारे जा चुके हैं. हाल ही में शिराज के जीबाशहर में हुए हमले में 20 लोग मारे गए और 30 लोग घायल हो गए.

अमेरिका और इजरायल की रणनीति

अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने अब ईरान के शासन के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर युद्ध के एक नए चरण की शुरुआत की है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने ईरान के गहरे क्षेत्रों में स्थित बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर्स को निशाना बनाने के लिए भारी बमबारी की है. इसके अलावा, इजराइल की वायु सेना ने भी ईरान के प्रमुख मिसाइल लॉन्चर्स और रक्षा प्रणालियों को नष्ट किया है. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी संकेत दिया है कि आगे इस युद्ध में और अधिक फाइटर स्क्वाड्रन और बॉम्बर पल्स का इस्तेमाल किया जाएगा.

जान-माल का भारी नुकसान

ईरान में इस युद्ध के कारण अब तक का सबसे गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न हो चुका है. ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार, अब तक 1,332 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें 181 बच्चे शामिल हैं. यूनिसेफ ने भी यह पुष्टि की है कि 175 बच्चे युद्ध के पहले दिन मीनाब में हुए हमले का शिकार बने थे. इसके अलावा, 3,643 नागरिक स्थलों को नुकसान पहुंच चुका है, जिनमें 3,090 घर, 528 वाणिज्यिक केंद्र और 14 चिकित्सा सुविधाएँ शामिल हैं. वहीं, इजराइल में भी इस संघर्ष ने कई जानें ली हैं, जिनमें 11 लोग मारे गए हैं और 1,600 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

क्षेत्रीय देशों पर असर

इस युद्ध का असर अब सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रह गया है. बहरीन ने पुष्टि की है कि उसने 78 ईरानी मिसाइलों और 143 ड्रोन को नष्ट कर दिया है, जो उसके क्षेत्र को निशाना बना रहे थे. बहरीन ने इसे ईरान का धोखेबाज हमला करार दिया है. इस संघर्ष का असर क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है, क्योंकि इससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है.

क्या अमेरिका जमीनी सेना भेजेगा? 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जमीनी सेना भेजने की संभावना को पूरी तरह से नकारा किया है, उनका कहना है कि यह "समय की बर्बादी" होगी क्योंकि ईरान अपनी नौसेना सहित "सब कुछ खो चुका है". वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इस संघर्ष को और अधिक बढ़ा सकता है और अमेरिकी हमलों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसे अमेरिका के लिए "बड़ी आपदा" बताया है.

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