US Iran Deal: लंबे समय से जारी तनाव और टकराव को समाप्त करने की दिशा में अमेरिका और ईरान ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है. अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर किए हैं.
इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की वार्ता टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे मोहम्मद बाकर गालिबाफ भी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर कर चुके थे, जिसके बाद समझौते को अंतिम मंजूरी मिली.
G7 सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने दी मंजूरी
जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते को डिजिटल रूप से स्वीकृति दी. समझौते के लागू होते ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है.
14 सूत्रीय समझौते में परमाणु कार्यक्रम पर शर्तें
समझौते में कुल 14 प्रमुख बिंदु शामिल हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा. इसके बदले उसे आर्थिक और विकास संबंधी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा.
ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर का प्रावधान
समझौते के तहत ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर तक के फंड की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है. हालांकि अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस राशि में अमेरिका का प्रत्यक्ष वित्तीय योगदान अनिवार्य नहीं होगा.
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह एक प्रदर्शन-आधारित व्यवस्था होगी, जिसमें ईरान को लाभ तभी मिलेगा जब वह समझौते में निर्धारित सभी शर्तों और प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा.
ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि समझौते का मुख्य उद्देश्य कई महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख समुद्री राह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सामान्य संचालन के लिए खोलना है.
पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
समझौते की प्रक्रिया में मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान ने दावा किया है कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर होने के साथ ही यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने समझौते को मंजूरी दे दी है.
उन्होंने कहा कि शुरुआती कदम के रूप में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलेगा, जबकि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा.
जिनेवा बैठक पर बनी हुई है स्थिति स्पष्ट होने की प्रतीक्षा
हालांकि वार्ता से जुड़ी टीमों का जिनेवा में एकत्र होने का कार्यक्रम बना हुआ है, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित बैठक का उद्देश्य समझौते पर हस्ताक्षर करना नहीं है. उनके अनुसार अंतिम निर्णय और आगे की औपचारिकताओं को लेकर स्थिति जल्द स्पष्ट हो सकती है.
अधिकारियों का कहना है कि समझौते को डिजिटल रूप से लागू किए जाने के बाद स्विट्जरलैंड में किसी बड़े औपचारिक हस्ताक्षर समारोह की आवश्यकता नहीं रह गई है. ऐसे में जिनेवा बैठक मुख्य रूप से आगे की प्रक्रियाओं और क्रियान्वयन पर केंद्रित रह सकती है.
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