India-UK FTA: भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है. इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है. एक तरफ भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में आसान पहुंच मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ ब्रिटेन से आयात होने वाले कई प्रीमियम उत्पाद भारतीय ग्राहकों के लिए पहले से सस्ते हो सकते हैं.
इस समझौते पर जुलाई 2025 में दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं और व्यापार मंत्रियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए थे. अब इसके लागू होने के साथ ही व्यापारिक शुल्कों में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा.
स्कॉच व्हिस्की पर घटेगा आयात शुल्क
भारत में ब्रिटेन से आने वाली स्कॉच व्हिस्की पर अब तक 150 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाता था. समझौते के तहत इसे पहले चरण में घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा और अगले 10 वर्षों में इसे 40 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क में कमी का सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है. उदाहरण के तौर पर, जो स्कॉच बोतल अभी लगभग 5,000 रुपये में उपलब्ध है, उसकी कीमत भविष्य में काफी कम हो सकती है.
Jaguar Land Rover और Rolls-Royce जैसी कारें सस्ती
भारत-ब्रिटेन एफटीए का असर लग्जरी ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी दिखाई दे सकता है. जगुआर लैंड रोवर, रोल्स-रॉयस और एस्टन मार्टिन जैसी ब्रिटिश लग्जरी कारों पर वर्तमान में लागू ऊंचे आयात शुल्क में कोटा आधारित व्यवस्था के तहत बड़ी कटौती की जाएगी.
रिपोर्ट्स के अनुसार, शुल्क में कमी से इन प्रीमियम वाहनों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है, जिससे भारतीय बाजार में इनकी मांग बढ़ने की संभावना है.
चॉकलेट, बिस्किट और प्रीमियम खाद्य उत्पादों पर भी असर
ब्रिटेन से आने वाले कई खाद्य और पेय उत्पाद भी इस समझौते के बाद अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकते हैं.
इनमें शामिल हैं:
आयात शुल्क कम होने से इन उत्पादों की कीमतों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है.
फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल उपकरणों को भी फायदा
ब्रिटिश फैशन ब्रांड्स के कपड़े, फुटवियर, होमवेयर, प्रीमियम फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद भी सस्ते हो सकते हैं.
इसके अलावा कॉस्मेटिक्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, मेडिकल डिवाइसेज और एयरोस्पेस सेक्टर से जुड़े उपकरणों पर औसत शुल्क में बड़ी कटौती की जाएगी. इससे स्वास्थ्य और तकनीकी क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है.
भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेगा बड़ा बाजार
समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय उद्योगों को मिल सकता है क्योंकि भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन में लगभग शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलने का रास्ता साफ होगा.
1. टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर
भारतीय कपड़ा उद्योग को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है. ब्रिटेन में भारतीय वस्त्रों पर लगने वाला 8 से 12 प्रतिशत तक का शुल्क समाप्त होने से निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत हो सकती है.
2. ज्वेलरी और लेदर उद्योग
भारत से निर्यात होने वाले चमड़े के उत्पाद, बैग, जूते और सोने-चांदी के आभूषणों को भी ब्रिटेन में शुल्क राहत मिलेगी, जिससे MSME क्षेत्र को नया बाजार मिल सकता है.
3. इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स
चेन्नई, पुणे और गुरुग्राम जैसे विनिर्माण केंद्रों से निर्यात होने वाले ऑटो पार्ट्स और औद्योगिक उपकरणों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है. इससे भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है.
4. फार्मास्यूटिकल सेक्टर
भारतीय जेनेरिक दवाओं को ब्रिटेन के स्वास्थ्य तंत्र में अपेक्षाकृत आसान और तेज प्रवेश मिलने की संभावना है, जिससे फार्मा निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है.
कृषि और खाद्य उत्पादों को भी मिलेगा लाभ
बासमती चावल, भारतीय चाय, मसाले और समुद्री उत्पादों के निर्यात को भी इस समझौते से नई गति मिलने की उम्मीद है. साथ ही ग्रीन एनर्जी और क्लीन टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में ब्रिटेन से निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
2030 तक व्यापार दोगुना होने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा. अनुमान है कि भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक बढ़कर लगभग 120 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना होगा.
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