मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट! अमेरिका ने ईरान पर फिर किए खतरनाक हमले, कई इलाकों में बरसाए बम

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष अब सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर साफ दिखाई देने लगा है.

us-iran-conflict-hormuz-strait-war-escalation-global-crisis
AI Generated

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष अब सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर साफ दिखाई देने लगा है. लगातार हवाई हमलों, समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे और क्षेत्रीय देशों पर हमलों के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील केंद्र बन गया है. इसी बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, लेकिन युद्ध के बढ़ते दायरे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है.

लगातार 10वीं रात अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले

अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि उसने लगातार दसवीं रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं. इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना बताया गया है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों पर हमले करने के लिए किया जा रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार ऑपरेशन के दौरान मिसाइल लॉन्च साइट्स, ड्रोन ठिकानों, तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर और संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया. अमेरिकी सेना का कहना है कि समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान जारी रहेगा.

अमेरिकी सैनिकों की मौत से बढ़ा तनाव

संघर्ष के बीच अमेरिकी सेना को भी लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. जॉर्डन में हुए हमलों में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि एक सैनिक अब भी लापता बताया जा रहा है. इसके अलावा इराक में एक ईरानी ड्रोन को निष्क्रिय करने की कार्रवाई के दौरान भी एक सैनिक की जान चली गई. इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने अपने सैन्य अभियान की तीव्रता और बढ़ा दी है. वॉशिंगटन का कहना है कि हर अमेरिकी सैनिक की मौत का जवाब दिया जाएगा.

ट्रंप की सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि किसी भी अमेरिकी सैनिक की हत्या होती है तो उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने सैनिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब डोवर एयर फोर्स बेस पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया.

ईरान के कई रणनीतिक इलाकों पर हमला

अमेरिकी हमलों में ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया. सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार तबरीज के पास हुए हमले में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई है. यह इलाका रिवोल्यूशनरी गार्ड के भूमिगत मिसाइल ठिकानों के लिए जाना जाता है. इसके अलावा बंदर इमाम खोमेनी, सिरिक, जास्क, कोनारक और चाबहार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी हमलों की खबरें सामने आई हैं. ये सभी इलाके ईरान की समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर लगातार हमले

होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक और जहाज पर हमला हुआ, जिसके बाद उसमें भीषण आग लग गई. ब्रिटिश समुद्री निगरानी एजेंसी के अनुसार जहाज के चालक दल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन जहाज घंटों तक समुद्र में जलता रहा. इससे पहले भी कई तेल टैंकरों और कारोबारी जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है, जिससे वैश्विक शिपिंग कंपनियों की चिंता बढ़ गई है.

कुवैत, जॉर्डन और बहरीन भी बने निशाना

ईरान और उसके सहयोगी समूहों की गतिविधियां अब केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहीं. कुवैत ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया. वहीं जॉर्डन ने तीन ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की जानकारी दी. बहरीन ने भी आरोप लगाया कि उसके एयर ट्रैफिक सिस्टम को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया गया, जिससे नागरिक उड्डयन को गंभीर खतरा पैदा हुआ. इन घटनाओं ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर पहुंचा दिया है.

पाकिस्तान के जरिए कूटनीतिक कोशिशें

हालांकि युद्ध का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर समाधान तलाशने की कोशिशें भी जारी हैं. ईरान के गृह मंत्री बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे हैं. पाकिस्तान इस पूरे संकट में संभावित मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है क्योंकि उसके दोनों पक्षों के साथ संवाद बने हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत सफल होती है तो क्षेत्र में तनाव कम होने की संभावना बन सकती है, हालांकि फिलहाल सैन्य गतिविधियां थमती नजर नहीं आ रही हैं.

हूती विद्रोहियों की नई चेतावनी

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा है कि लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच होने वाली जहाजों की आवाजाही को रोका जाएगा. हूतियों का दावा है कि यह कदम सना एयरपोर्ट पर हुए हमलों के जवाब में उठाया गया है. इससे पहले भी वे गाजा युद्ध के दौरान लाल सागर में कई जहाजों को निशाना बना चुके हैं.

तेल बाजार पर बढ़ा दबाव

युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव देखने को मिल रहा है. होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत भी चार डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो दुनिया भर में ईंधन और परिवहन लागत में और वृद्धि हो सकती है, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा.

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है. युद्ध से पहले वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था. यदि यह मार्ग पूरी तरह बाधित होता है तो एशिया, यूरोप और अमेरिका तक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. इसी कारण अमेरिका इस समुद्री मार्ग को दोबारा पूरी तरह सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान इसे अपने रणनीतिक दबाव के सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.

ये भी पढ़ें: ट्रंप ने कनाडा को दिया बड़ा झटका, लगाया 50 फीसदी टैरिफ, जानें अमेरिकी राष्ट्रपति के गुस्से की वजह