दुनिया में बज रहा भारतीय हथियारों का डंका, 'अस्त्र मिसाइल' खरीद सकते हैं सऊदी समेत यह 6 देश, जानें ताकत

भारत की स्वदेशी 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल को लेकर दुनिया के कई देशों की दिलचस्पी बढ़ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब, आर्मेनिया समेत कम से कम 6 देश इस मिसाइल को खरीदने के लिए भारत से बातचीत कर रहे हैं.

These 6 countries including Saudi Arabia could buy DRDO Indias Astra missile
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नई दिल्ली: भारत की स्वदेशी 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल को लेकर दुनिया के कई देशों की दिलचस्पी बढ़ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब, आर्मेनिया समेत कम से कम 6 देश इस मिसाइल को खरीदने के लिए भारत से बातचीत कर रहे हैं.

यह ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत का रक्षा निर्यात लगातार बढ़ रहा है और वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

इंडोनेशिया के साथ भी बनी सहमति

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल को लेकर सैद्धांतिक सहमति बनी थी.

अब दोनों देश मिसाइलों की संख्या, कीमत और अन्य शर्तों पर आगे बातचीत करेंगे.

आर्मेनिया के साथ बातचीत तेज

रिपोर्ट के अनुसार, आर्मेनिया इस मिसाइल को खरीदने के लिए भारत के साथ उन्नत स्तर की बातचीत कर रहा है.

बताया जा रहा है कि आर्मेनिया अपने Su-30SM लड़ाकू विमानों में अस्त्र मिसाइल को शामिल करना चाहता है. इससे पहले भी आर्मेनिया भारत से कई रक्षा उपकरण खरीद चुका है.

पहले भी खरीद चुका है भारतीय हथियार

आर्मेनिया भारत से पहले ही कई बड़े रक्षा सौदे कर चुका है. इनमें शामिल हैं:

  • आकाश एयर डिफेंस सिस्टम
  • पिनाका रॉकेट सिस्टम
  • स्वाति रडार
  • 155 मिमी एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन
  • एंटी-ड्रोन सिस्टम

अब अस्त्र मिसाइल भी इस सूची में शामिल हो सकती है.

सऊदी अरब भी दिखा रहा दिलचस्पी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब भी अपने लड़ाकू विमानों में अस्त्र मिसाइल लगाने की संभावना पर भारत के साथ बातचीत कर रहा है.

रॉयल सऊदी एयर फोर्स के पास F-15 और यूरोफाइटर टाइफून जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान हैं. इन विमानों के साथ अस्त्र मिसाइल को जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है.

क्या है अस्त्र मिसाइल?

अस्त्र भारत की पहली स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे DRDO और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने मिलकर विकसित किया है.

  • अस्त्र Mk-1 की रफ्तार करीब मैक 4.5 है.
  • इसकी मारक क्षमता 80 से 110 किलोमीटर तक है.
  • Mk-2 संस्करण का सफल परीक्षण हो चुका है और इसकी रेंज 200 से 240 किलोमीटर बताई गई है.
  • वहीं Mk-3 पर काम जारी है, जिसकी प्रस्तावित रेंज 300 किलोमीटर से ज्यादा होगी.

बढ़ेगा 'मेक इन इंडिया' को फायदा

अस्त्र मिसाइल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए सरकार इसके उत्पादन में निजी कंपनियों को भी शामिल करने की तैयारी कर रही है.

अगर इन देशों के साथ सौदे पूरे होते हैं, तो इससे भारत के रक्षा निर्यात को और मजबूती मिलेगी और 'मेक इन इंडिया' को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा.

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