ईरान पर बड़े हमले की आहट? इजराइल में अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमानों की भारी तैनाती, क्या है ट्रंप का प्लान?

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार नए स्तर पर पहुंचता दिख रहा है. सैन्य गतिविधियों में तेजी और रणनीतिक तैयारियों के बीच अब अमेरिका इजराइल में अपनी हवाई ताकत को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

us-expands-israel-airpower-amid-rising-iran-war-tensions
AI Generated

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार नए स्तर पर पहुंचता दिख रहा है. सैन्य गतिविधियों में तेजी और रणनीतिक तैयारियों के बीच अब अमेरिका इजराइल में अपनी हवाई ताकत को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाशिंगटन लंबी दूरी के सैन्य अभियानों को लगातार जारी रखने के लिए अतिरिक्त एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान तैनात करने की तैयारी कर रहा है. इसे केवल सैन्य तैनाती नहीं, बल्कि ईरान पर दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. दूसरी ओर, इन विमानों की मौजूदगी इजराइल की घरेलू राजनीति में भी नया विवाद खड़ा कर रही है, क्योंकि चुनाव से पहले सरकार पर नागरिक सुविधाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का दबाव बढ़ गया है.

इजराइल में बढ़ेगी अमेरिकी एयर पावर

रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल में पहले से ही 60 से अधिक अमेरिकी एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान मौजूद हैं. इनमें से करीब 30 विमान तेल अवीव के पास स्थित बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तैनात हैं, जबकि लगभग 30 विमान दक्षिणी इजराइल के रेमन एयरबेस पर रखे गए हैं.

अब अमेरिका दर्जनों और रिफ्यूलिंग विमान भेजने की तैयारी में है. इन विमानों की सबसे बड़ी भूमिका लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले फाइटर जेट और बॉम्बर विमानों को हवा में ही ईंधन उपलब्ध कराना है, जिससे वे बिना रुके लगातार सैन्य अभियान चला सकें. माना जा रहा है कि पेंटागन इन विमानों को मुख्य रूप से बेन गुरियन एयरपोर्ट पर रखना चाहता है, क्योंकि अन्य सैन्य एयरबेस ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के लिहाज से अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं.

ईरान पर बढ़ सकता है दबाव

व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों की विस्तृत जानकारी दी गई. बताया जा रहा है कि अब केवल होर्मुज स्ट्रेट तक सीमित कार्रवाई की बजाय ईरान के भीतर गहरे सैन्य अभियानों पर भी विचार किया जा रहा है. हालांकि किसी अंतिम फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी रणनीति का उद्देश्य ईरान पर इतना दबाव बनाना है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खुला रखे और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर हो जाए.

किन ठिकानों पर हो सकती है कार्रवाई?

अमेरिकी रणनीतिक योजना में ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को संभावित निशाना बनाए जाने की चर्चा है. इसमें बिजली उत्पादन केंद्रों पर हमले की संभावना जताई जा रही है, ताकि सैन्य और औद्योगिक गतिविधियों पर असर डाला जा सके. इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकाने भी संभावित लक्ष्य बताए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, संवर्धित यूरेनियम भंडार और भूमिगत परमाणु सुविधाओं पर भी कार्रवाई के विकल्प तैयार किए गए हैं. पिकएक्स माउंटेन क्षेत्र में कथित तौर पर विकसित की जा रही भूमिगत परमाणु सुविधा भी अमेरिकी निगरानी में बताई जा रही है.

होर्मुज स्ट्रेट से लेकर बंदर अब्बास तक जारी हैं सैन्य हमले

क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं. अमेरिकी अभियान होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों तक फैला हुआ है. रिपोर्ट्स के अनुसार, बंदर अब्बास के आसपास कई रणनीतिक पुलों को निशाना बनाया गया है. बंदर अब्बास को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का एक प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्र माना जाता है, जहां से होर्मुज क्षेत्र में सैन्य रसद और गोला-बारूद की आपूर्ति की जाती है.

दूसरी ओर, ईरान समर्थित सैन्य गतिविधियों में भी तेजी देखने को मिली है. जॉर्डन, कतर, बहरीन, इराक और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिशों की खबरें सामने आई हैं. वहीं IRGC ने सीरिया में एक अमेरिकी बेस पर हमले का दावा भी किया है, हालांकि बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना पहले ही उस ठिकाने को खाली कर चुकी थी.

इजराइल की राजनीति में बढ़ा विवाद

अमेरिका की सैन्य तैयारियां अब इजराइल के भीतर भी राजनीतिक बहस का विषय बन गई हैं. युद्ध के शुरुआती दौर में जब इजराइल का हवाई क्षेत्र लगभग बंद था, तब बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैन्य विमानों की मौजूदगी कोई बड़ा मुद्दा नहीं थी. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. गर्मियों की छुट्टियों के कारण कमर्शियल उड़ानों की संख्या बढ़ रही है और ऐसे में दर्जनों बड़े सैन्य विमानों की पार्किंग से यात्री विमानों के संचालन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

चुनाव से पहले नेतन्याहू सरकार पर बढ़ा दबाव

इजराइल में आगामी तीन महीनों के भीतर आम चुनाव होने हैं. ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है. परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने मांग की है कि अमेरिकी विमानों की संख्या कम की जाए या उन्हें किसी अन्य एयरबेस पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि नागरिक उड़ानों में बाधा न आए. हालांकि इजराइली रक्षा मंत्रालय और सेना इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं. उनका मानना है कि मौजूदा सुरक्षा हालात में अमेरिकी विमानों की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है. बताया जा रहा है कि वाशिंगटन ने भी इजराइल से इन विमानों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है. अब इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेना है.

ये भी पढ़ें: पाकिस्तान के खिलाफ नया मोर्चा! बलूचिस्तान और अफगानिस्तान की बढ़ी नजदीकियां, डूरंड लाइन पर क्या हुआ?