Ukraine Deep Strikes Russia: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब एक नए चरण में पहुंचता दिख रहा है. यूक्रेन ने अब रूस के अंदर तक जाकर हमले शुरू कर दिए हैं. यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि उनकी सेना ने रूस के करीब 1200 किलोमीटर अंदर तक कई ठिकानों को निशाना बनाया है.
इन हमलों में हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां, तेल रिफाइनरी, ईंधन डिपो, लॉजिस्टिक्स सेंटर और कैस्पियन सागर में मौजूद जहाज शामिल हैं. जेलेंस्की ने इन कार्रवाइयों को "लंबी दूरी की रोकथाम" रणनीति बताया है. उनका कहना है कि इसका मकसद रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करना है.
रूस की युद्ध मशीन को निशाना बनाने की कोशिश
यूक्रेन का कहना है कि रूस लगातार उसके शहरों और ऊर्जा ढांचे पर हमला कर रहा है. इसके जवाब में अब यूक्रेन ने रूस के अंदर मौजूद उन ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया है, जो युद्ध में रूस की मदद कर रहे हैं.
पहले यूक्रेन के हमले ज्यादातर सीमा के आसपास के इलाकों तक सीमित थे, लेकिन अब यूक्रेनी ड्रोन और लंबी दूरी के हथियार रूस के दूर-दराज इलाकों तक पहुंच रहे हैं. जेलेंस्की के मुताबिक, ये हमले रूस के उराल और साइबेरिया जैसे अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं, जिससे युद्ध की दिशा बदल सकती है.
Ukraine continues applying long‑range sanctions in response to Russian strikes. Last night, the warriors of our Defense Forces hit targets across different regions of Russia that are fueling this war.
— Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) July 25, 2026
Once again, a plant in Kirov was struck – the one supplying components for the… pic.twitter.com/D0Z6bFRiww
हथियार फैक्ट्री और तेल ठिकानों पर हमला
यूक्रेन ने रूस के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है. कीरोव इलाके में एक हथियार बनाने वाले प्लांट पर हमला किया गया. यूक्रेन के अनुसार, यह फैक्ट्री रूस को युद्ध से जुड़े उपकरणों और हथियारों के हिस्सों की सप्लाई करती थी. यह जगह यूक्रेन की सीमा से करीब 1200 किलोमीटर दूर बताई जा रही है.
इसके अलावा त्युमेन में एक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया गया, जिसके बाद वहां आग लगने की खबर सामने आई. येकातेरिनबर्ग में एक बड़े लॉजिस्टिक्स सेंटर को भी निशाना बनाया गया. यूक्रेन का कहना है कि इस तरह के ठिकाने रूस की सप्लाई चेन के लिए बेहद जरूरी हैं.
कैस्पियन सागर में जहाजों को बनाया निशाना
यूक्रेन के हमलों में सबसे ज्यादा चर्चा कैस्पियन सागर की घटना को लेकर हो रही है. जेलेंस्की के अनुसार, यहां ईरान से जुड़े सैन्य सामान ले जाने वाले जहाजों और एक युद्धपोत को नुकसान पहुंचाया गया.
यूक्रेन का आरोप है कि ईरान रूस को ड्रोन और सैन्य उपकरणों की मदद करता है. ऐसे में इन जहाजों को निशाना बनाकर यूक्रेन रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है.
रूस ने नुकसान को कम बताया
रूसी अधिकारियों ने इन हमलों की पुष्टि तो की है, लेकिन बड़े नुकसान से इनकार किया है. रूस का कहना है कि कई जगहों पर सिर्फ आग लगने जैसी घटनाएं हुईं और उन्हें जल्दी नियंत्रित कर लिया गया. हालांकि, कुछ रिपोर्टों और तस्वीरों में कई जगहों पर हमलों के असर की बात कही जा रही है.
रूस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यूक्रेन अब उसके सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों तक पहुंचने लगा है. इससे रूस को अपनी सुरक्षा व्यवस्था और एयर डिफेंस को मजबूत करना पड़ेगा.
युद्ध पर क्या पड़ेगा असर?
यूक्रेन के इन हमलों से युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है. अब तक रूस यूक्रेन के शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता रहा है, लेकिन यूक्रेन भी जवाबी कार्रवाई में रूस के अंदर तक हमला करने की क्षमता दिखा रहा है. अगर यूक्रेन लगातार रूस की तेल सप्लाई, हथियार उत्पादन और सैन्य सप्लाई लाइन को नुकसान पहुंचाने में सफल रहता है, तो इसका असर रूस की युद्ध क्षमता पर पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर में फिर दिखा पाकिस्तानी ड्रोन, सांबा और कठुआ में सुरक्षा बलों ने चलाया बड़ा सर्च ऑपरेशन