पुल-पावर प्लांट होंगे निशाने पर... ट्रंप ने पहले ही सेट कर लिया अगले हफ्ते का टारगेट, जानें क्या कहा

US-Iran War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि यदि ईरान बातचीत की राह नहीं चुनता, तो अमेरिका अपने सैन्य अभियान को और तेज करेगा.

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US-Iran War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि यदि ईरान बातचीत की राह नहीं चुनता, तो अमेरिका अपने सैन्य अभियान को और तेज करेगा. ट्रंप ने कहा कि अगले चरण में ईरान के पावर प्लांट, पुल और अन्य अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है. व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संभावित बड़े सैन्य अभियानों पर विस्तार से चर्चा की गई. दूसरी ओर, ईरान भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है.

क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से आगे बढ़ेगा अमेरिकी अभियान?

व्हाइट हाउस की यह बैठक ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी सेना लगातार चौथे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के दक्षिणी तट पर सैन्य कार्रवाई कर रही थी. अमेरिकी हमलों में ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों, रडार प्रतिष्ठानों, एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों और ड्रोन लॉन्च साइटों को निशाना बनाया गया.

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिसके जरिए वह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है.

ट्रंप ने बड़े हमलों की दी चेतावनी

उच्चस्तरीय बैठक से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में संकेत दिया कि आने वाले दिनों में सैन्य अभियान और तेज होने वाला है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि ईरान बातचीत करने से इनकार करता है तो अमेरिका पहले से कहीं बड़े हमले करेगा.

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना अगले तीन दिनों में ईरान पर जोरदार हमला करने की तैयारी में है. उन्होंने आगे कहा कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा और अगले सप्ताह ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा. ट्रंप के अनुसार, "अगला हफ्ता उनके लिए बहुत बुरा होने वाला है, क्योंकि अगले हफ्ते पावर प्लांट और पुलों पर हमले होंगे. हम उनके सभी पावर प्लांट और पुलों को नष्ट कर देंगे, जब तक कि वे बातचीत की मेज पर नहीं आते."

बैठक में शामिल हुए शीर्ष अधिकारी

व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई इस अहम बैठक में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लगभग सभी प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ, व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अन्य वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए.

तेहरान पर दबाव बढ़ाने की बनी रणनीति

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य अभियानों के विकल्पों पर चर्चा करना था. रणनीति यह बताई जा रही है कि तेहरान पर इतना दबाव बनाया जाए कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला रखने के साथ-साथ अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की प्रमुख मांगों को भी स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाए.

'पिकएक्स माउंटेन' पर अमेरिका की नजर क्यों?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में 'पिकएक्स माउंटेन' का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका वहां हो रही गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रहा है. बताया जाता है कि यह जमीन के काफी नीचे स्थित एक ऐसा परिसर है, जिसके बारे में अमेरिकी और इजराइली अधिकारियों का मानना है कि इसका उपयोग ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कार्यों के लिए किया जा सकता है. अमेरिकी 'बंकर-बस्टर' बम जमीन के भीतर मौजूद ठिकानों को भी निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं.

हालांकि ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि वहां वास्तव में कोई परमाणु गतिविधि चल रही है. उन्होंने कहा, "वैसे, किसी को नहीं पता कि वे 'पिकएक्स' में कुछ कर भी रहे हैं या नहीं. यह बस एक संभावना है, जिस पर चर्चा हो रही है. हमने वहां निगरानी के लिए कैमरे लगा रखे हैं. फिलहाल वहां बहुत कम गतिविधि दिखाई दे रही है, लेकिन अगर ज़रा भी हलचल हुई तो हम उस पर ज़ोरदार हमला करेंगे."

खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा है तनाव

खाड़ी क्षेत्र में जारी सैन्य अभियानों के कारण हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हालिया हमलों का उद्देश्य ईरान की वायु रक्षा प्रणाली को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर एंटी-शिप मिसाइल तथा ड्रोन हमले करने की उसकी क्षमता को खत्म करना है. अमेरिका का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में ईरान की सैन्य क्षमता सीमित नहीं की गई, तो वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है.

ईरान भी कर रहा है जवाबी कार्रवाई

अमेरिकी सैन्य अभियानों के बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं.

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