दुनिया का सबसे महंगा डायनासोर, 482 करोड़ रुपये में बिका कंकाल, जानिए यह क्यों है इतना खास

World Most Expensive Dinosaur Auction: अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित एक ऐतिहासिक नीलामी में 'गस' (Gus) नाम के टायरानोसॉरस रेक्स (T. rex) के कंकाल ने ऐसा ही रिकॉर्ड बनाया है. लगभग 7 करोड़ वर्ष पुराने इस जीवाश्म को 50.1 मिलियन डॉलर यानी करीब 482 करोड़ रुपये में खरीदा गया.

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World Most Expensive Dinosaur Auction: करोड़ों साल पहले धरती पर राज करने वाले डायनासोर आज भी वैज्ञानिकों और इतिहास प्रेमियों के लिए उतने ही रहस्यमयी हैं. लेकिन जब इन्हीं प्राचीन जीवों के अवशेष अरबों की संपत्ति बन जाएं, तो पूरी दुनिया का ध्यान उनकी ओर खिंचना तय है. अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित एक ऐतिहासिक नीलामी में 'गस' (Gus) नाम के टायरानोसॉरस रेक्स (T. rex) के कंकाल ने ऐसा ही रिकॉर्ड बनाया है. लगभग 7 करोड़ वर्ष पुराने इस जीवाश्म को 50.1 मिलियन डॉलर यानी करीब 482 करोड़ रुपये में खरीदा गया. इसके साथ ही यह दुनिया का अब तक का सबसे महंगा बिकने वाला डायनासोर फॉसिल बन गया है.

10 मिनट की बोली और बन गया नया विश्व रिकॉर्ड

यह ऐतिहासिक नीलामी 14 जुलाई को न्यूयॉर्क स्थित सोथबीज (Sotheby’s) नीलामी घर में आयोजित की गई. शुरुआत में विशेषज्ञों ने इस दुर्लभ जीवाश्म की कीमत 20 से 30 मिलियन डॉलर के बीच रहने का अनुमान लगाया था.

हालांकि जैसे ही बोली शुरू हुई, सात अलग-अलग खरीदारों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली. करीब 10 मिनट तक चली इस नीलामी में कीमत लगातार बढ़ती गई और अंततः 'गस' 50.1 मिलियन डॉलर में बिक गया. इस बिक्री ने डायनासोर जीवाश्मों की दुनिया में नया इतिहास रच दिया.

आखिर क्यों इतना खास है 'गस'?

'गस' को दुनिया के सबसे सुरक्षित और सबसे अधिक पूर्ण T. rex कंकालों में गिना जाता है. इसमें कुल 183 जीवाश्म हड्डियां शामिल हैं, जो इसे वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती हैं. इस दुर्लभ कंकाल की खोज वर्ष 2021 में अमेरिका के साउथ डकोटा स्थित एक कैटल रैंच में हुई थी. विशेषज्ञों के अनुसार इसकी संरचना इतनी अच्छी स्थिति में है कि इससे वैज्ञानिक डायनासोर के जीवन, व्यवहार और शारीरिक बनावट के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं.

करोड़ों साल पुरानी हड्डियां सुनाती हैं संघर्ष की कहानी

'गस' की हड्डियां केवल उसकी उम्र ही नहीं बतातीं, बल्कि उसके जीवन में हुए संघर्षों की भी गवाही देती हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी खोपड़ी के ऊपरी हिस्से पर गहरे काटने का निशान मौजूद है, जो संभवतः किसी दूसरे बड़े शिकारी के साथ हुई लड़ाई का परिणाम रहा होगा. इसके अलावा इसकी कई पसलियां कभी टूट चुकी थीं, लेकिन बाद में वे प्राकृतिक रूप से जुड़ गईं. इन स्थानों पर बने बड़े उभार बताते हैं कि यह विशाल शिकारी गंभीर चोटों के बावजूद लंबे समय तक जीवित रहा था.

धरती पर जब राज करता था T. rex

वैज्ञानिकों के अनुसार यह विशाल जीव लगभग 7.2 करोड़ से 6.6 करोड़ वर्ष पहले धरती पर मौजूद था. उस समय पृथ्वी का तापमान आज की तुलना में काफी अधिक था, समुद्र का जलस्तर ऊंचा था और तटीय क्षेत्रों में बार-बार बाढ़ आती थी. 'गस' की लंबाई लगभग 38 फीट (करीब 11.6 मीटर) है, जिससे यह अब तक खोजे गए सबसे बड़े टायरानोसॉरस रेक्स में शामिल हो जाता है. उपलब्ध जीवाश्मों के आधार पर यह कंकाल लगभग 63 प्रतिशत पूर्ण माना जाता है, जो इसे और भी दुर्लभ बनाता है.

किसने खरीदा दुनिया का सबसे महंगा डायनासोर?

इतनी बड़ी रकम में बिकने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर इस ऐतिहासिक कंकाल का नया मालिक कौन है. हालांकि नीलामी में सफल बोली लगाने वाले खरीदार की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है. माना जा रहा है कि यह कोई निजी संग्रहकर्ता, बड़ा उद्योगपति या फिर कोई प्रतिष्ठित संग्रहालय भी हो सकता है. फिलहाल खरीदार का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा गया है.

निजी हाथों में जा रहे हैं इतिहास के अनमोल खजाने

डायनासोर जीवाश्मों की बढ़ती कीमतों ने वैज्ञानिक समुदाय के बीच नई बहस भी छेड़ दी है. कई जीवाश्म वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के दुर्लभ और ऐतिहासिक नमूने निजी संग्रहों में चले जाने से वैज्ञानिक शोध और आम लोगों की पहुंच सीमित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अवशेष संग्रहालयों और शोध संस्थानों में होने चाहिए, जहां इनका अध्ययन किया जा सके और आम लोग भी इन्हें देख सकें.

अमेरिका में जीवाश्म बेचने का अलग है कानून

सोथबीज में साइंस एंड नेचुरल हिस्ट्री विभाग की प्रमुख कैसंड्रा हैटन के अनुसार अमेरिका दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां निजी जमीन पर मिलने वाले जीवाश्मों को संपत्ति माना जाता है. इसका मतलब है कि यदि किसी व्यक्ति की जमीन पर डायनासोर का जीवाश्म मिलता है, तो वह उसका कानूनी मालिक होता है और उसे बेचने का अधिकार भी रखता है. यही वजह है कि दुनिया के सबसे दुर्लभ डायनासोर जीवाश्मों की नीलामी अक्सर अमेरिका में होती है.

टूट गया पिछला रिकॉर्ड

इस ऐतिहासिक बिक्री के साथ जीवाश्म नीलामी का पुराना रिकॉर्ड भी टूट गया. इससे पहले यह रिकॉर्ड 'एपेक्स' (Apex) नाम के स्टेगोसॉरस जीवाश्म के नाम था, जिसे वर्ष 2024 में हेज फंड अरबपति केन ग्रिफिन ने 44.6 मिलियन डॉलर में खरीदा था. अब 'गस' ने 50.1 मिलियन डॉलर की बिक्री के साथ दुनिया के सबसे महंगे डायनासोर जीवाश्म का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. यह घटना न केवल जीवाश्मों के बढ़ते वैश्विक बाजार को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि करोड़ों साल पुराना इतिहास आज भी लोगों के लिए कितना मूल्यवान और आकर्षक बना हुआ है.

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