Cabinet Meeting Decisions: भारत की अर्थव्यवस्था को अगले दशक की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, कृषि और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कई अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. कुल 2,19,353 करोड़ रुपये के निवेश वाले इस पैकेज का उद्देश्य देश में कनेक्टिविटी को मजबूत करना, औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है. इनमें वाराणसी के लिए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मिशन का नया चरण, मोबाइल निर्माण को बढ़ावा देने वाली योजना और रेलवे नेटवर्क के विस्तार जैसे कई महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं.
2.19 लाख करोड़ रुपये से विकास को मिलेगी नई रफ्तार
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत 2,19,353 करोड़ रुपये है. सरकार का मानना है कि ये निवेश केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं करेंगे, बल्कि रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी नई गति देंगे. इससे देश की आर्थिक गतिविधियों को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है.
वाराणसी के लिए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी
वाराणसी में लगातार बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दो महत्वाकांक्षी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है. पहली परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच गंगा नदी के किनारे विकसित की जाएगी. करीब 46.039 किलोमीटर लंबे इस छह लेन ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर की अनुमानित लागत 14,447.64 करोड़ रुपये होगी.
इस परियोजना में आधुनिक केबल-स्टे ब्रिज, एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज, फ्लाईओवर, रैंप, लूप, लिंक रोड और सर्विस रोड जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत बनाया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे शहर के भीतर ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी आएगी और राष्ट्रीय राजमार्ग तथा रिंग रोड के बीच तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी स्थापित होगी.
वरुणा नदी के किनारे भी बनेगा आधुनिक कॉरिडोर
दूसरी बड़ी परियोजना वरुणा नदी के किनारे विकसित होने वाला लिंक कॉरिडोर है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा. लगभग 43.218 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 10,998.32 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस एलिवेटेड कॉरिडोर में 6 और 4 लेन के मुख्य मार्ग, फ्लाईओवर, सर्विस रोड, रैंप और लूप बनाए जाएंगे. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस परियोजना को भी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत विकसित करेगा. सरकार का उद्देश्य शहर के भीतरी हिस्सों में ट्रैफिक का दबाव कम करना और आवागमन को अधिक सुरक्षित एवं तेज बनाना है.
रेलवे नेटवर्क मजबूत करने पर फोकस
कैबिनेट ने रेलवे क्षेत्र में भी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है. ओडिशा के पारादीप-हरिदासपुर रेल मार्ग के दोहरीकरण के लिए 2,542 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. इस परियोजना से बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी. इसके अलावा डांगोआपोसी-राजखरसावां रेलखंड पर चौथी लाइन बिछाने के लिए 1,365 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. इस विस्तार से इस व्यस्त रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू होगा और औद्योगिक परिवहन को गति मिलेगी.
कृषि क्षेत्र के लिए नई यूरिया निवेश नीति को मंजूरी
कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में कैबिनेट ने राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को भी मंजूरी दी है. इस नई नीति का उद्देश्य देश में यूरिया के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और किसानों के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होगी और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत बनेगी. इससे कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है.
सेमीकंडक्टर 2.0 योजना को मिला सबसे बड़ा बजट
कैबिनेट के सबसे बड़े फैसलों में से एक सेमीकंडक्टर 2.0 योजना है. भारत को वैश्विक चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ इस योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग को रणनीतिक महत्व का क्षेत्र माना जाता है. ऐसे में सरकार का यह निवेश घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को नई मजबूती देने के साथ-साथ विदेशी निवेश आकर्षित करने और हाई-टेक रोजगार के अवसर बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए नई योजना
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने मोबाइल फोन निर्माण योजना (MPMS) को भी मंजूरी दी है. इस योजना के लिए 62,500 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है. इस पहल का उद्देश्य देश में मोबाइल हैंडसेट का उत्पादन बढ़ाना, वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना और निर्यात क्षमता को मजबूत करना है. सरकार का मानना है कि यह योजना 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को नई गति देगी.
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