भारत ने UNSC की अस्थायी सीट के लिए शुरू किया SHANTI अभियान, जानिए क्यों है यह अहम

SHANTI Campaign: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए अपना नया अभियान शुरू कर दिया है. इस अभियान का नाम SHANTI रखा गया है. भारत साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बनना चाहता है. इसके लिए चुनाव जून 2027 में होगा.

India launches Shanti campaign for a non-permanent UNSC seat here why it is significant
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SHANTI Campaign: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता के लिए अपना नया अभियान शुरू कर दिया है. इस अभियान का नाम SHANTI रखा गया है. भारत साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बनना चाहता है. इसके लिए चुनाव जून 2027 में होगा.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इस अभियान की शुरुआत की. भारत का कहना है कि यह सिर्फ चुनाव जीतने की कोशिश नहीं है, बल्कि दुनिया के सामने उसकी सोच और प्राथमिकताओं को रखने का एक मौका भी है. भारत संदेश देना चाहता है कि वह दुनिया में शांति, सुरक्षा, विकास और बेहतर वैश्विक व्यवस्था के लिए सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है.

भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए भारत एशिया-प्रशांत समूह की एक सीट पर चुनाव लड़ेगा. इस सीट के लिए भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा. चुनाव में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्य देश मतदान करेंगे. भारत पहले भी कई बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है और अब 2028-29 के लिए एक बार फिर इस भूमिका में आना चाहता है.

क्या है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है. इसका मुख्य काम अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है. युद्ध, आतंकवाद, प्रतिबंध, शांति मिशन और बड़े वैश्विक संकटों पर सुरक्षा परिषद अहम फैसले लेती है.

सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं. इनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस पांच स्थायी सदस्य हैं. इन देशों के पास वीटो पावर होती है, जिससे वे किसी बड़े प्रस्ताव को रोक सकते हैं. बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं, जिन्हें दो साल के लिए चुना जाता है. भारत इसी अस्थायी सदस्य वाली सीट के लिए चुनाव लड़ रहा है.

क्या है भारत का SHANTI अभियान?

SHANTI का पूरा नाम "Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity" है. आसान भाषा में इसका मतलब है- नियमों, भरोसे और ईमानदारी के जरिए दुनिया में बेहतर विकास और सुरक्षा सुनिश्चित करना.

भारत का मानना है कि शांति और विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. अगर दुनिया में युद्ध, तनाव और अविश्वास बढ़ेगा तो विकास भी प्रभावित होगा. इस अभियान के जरिए भारत तीन मुख्य बातों पर जोर दे रहा है:

  • अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान
  • देशों के बीच भरोसा बढ़ाना
  • वैश्विक संस्थाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी

भारत लंबे समय से "वसुधैव कुटुम्बकम" यानी पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की सोच को आगे बढ़ाता रहा है.

भारत ने अभी क्यों शुरू किया अभियान?

इस समय दुनिया कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव, गाजा संघर्ष, आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दे वैश्विक चिंता बने हुए हैं. इसके अलावा साइबर हमले, फर्जी खबरें, ड्रोन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल जैसी नई सुरक्षा चुनौतियां भी सामने आ रही हैं.

भारत का कहना है कि ऐसी स्थिति में संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की भूमिका और मजबूत होनी चाहिए. साथ ही इसमें विकासशील देशों की भागीदारी भी बढ़नी चाहिए.

SHANTI अभियान में भारत की मुख्य प्राथमिकताएं

ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करना

भारत चाहता है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे विकासशील देशों की आवाज वैश्विक फैसलों में ज्यादा सुनी जाए. भारत खाद्य सुरक्षा, कर्ज, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, ऊर्जा और विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता देना चाहता है.

सुरक्षा परिषद में सुधार

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है. भारत का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था 1945 के समय की जरूरतों के हिसाब से बनी थी, लेकिन आज दुनिया बदल चुकी है. एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका बढ़ गई है, इसलिए सुरक्षा परिषद में भी बदलाव जरूरी है.

आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई

भारत आतंकवाद को अपनी बड़ी सुरक्षा चुनौती मानता है. भारत चाहता है कि आतंकवादी संगठनों और उन्हें समर्थन देने वालों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई हो. भारत आतंकवाद की फंडिंग रोकने, हथियारों और सुरक्षित ठिकानों पर रोक लगाने की बात भी उठाता रहा है.

समुद्री सुरक्षा पर जोर

भारत के लिए समुद्री सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उसका बड़ा व्यापार समुद्री रास्तों से होता है. भारत सुरक्षित और खुले समुद्री मार्गों का समर्थन करता है. वह समुद्री डकैती, मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी और जहाजों पर होने वाले हमलों को रोकने पर जोर देगा.

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन को मजबूत बनाना

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में योगदान देता रहा है. भारत का मानना है कि इन मिशनों को बेहतर तकनीक, संसाधन और साफ लक्ष्य मिलने चाहिए ताकि वे संघर्ष वाले क्षेत्रों में बेहतर तरीके से काम कर सकें.

मानव हित में एआई का इस्तेमाल

भारत चाहता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल मानव कल्याण के लिए हो. एआई का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आपदा प्रबंधन में मदद कर सकता है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल से खतरे भी पैदा हो सकते हैं. भारत सुरक्षित और जिम्मेदार एआई व्यवस्था की वकालत करता है ताकि इसका फायदा सभी देशों को मिल सके.

भारत को क्या फायदा होगा?

अगर भारत सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बनता है तो उसे दुनिया के बड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने का एक मजबूत मंच मिलेगा. भारत आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, वैश्विक शांति और विकास जैसे मुद्दों पर अपनी भूमिका और प्रभाव बढ़ा सकेगा. इसके अलावा विकासशील देशों के बीच भारत की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी. 

भारत खुद को सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में पेश करना चाहता है. भारत का लक्ष्य सिर्फ सुरक्षा परिषद की सीट हासिल करना नहीं है. वह दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि बदलते समय में एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की जरूरत है जिसमें सभी देशों की भागीदारी हो. अगर भारत चुना जाता है, तो 2028-29 के दौरान उसे दुनिया के सबसे अहम सुरक्षा मंचों में से एक पर काम करने का मौका मिलेगा.

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