वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से दुनिया के सामने अपनी कड़ी नीतियों को रखा है. इस बार उनका निशाना ग्रीनलैंड है, जिसे लेकर उन्होंने दुनिया को एक धमकी दी है. ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जो देश ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण का समर्थन नहीं करेंगे, उन पर भारी व्यापार शुल्क (टैरिफ) लगाया जाएगा.
ग्रीनलैंड और अमेरिका के बढ़ते रिश्ते
पिछले कुछ महीनों से ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर अपनी योजनाओं का खुलासा कर रहे हैं. ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का एक स्वशासी क्षेत्र है, दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और उसकी भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. ट्रंप ने पहले भी इस बात पर जोर दिया था कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से रणनीतिक दृष्टि से अमेरिका को कोई नुकसान न हो. इस बार उन्होंने एक नई धमकी दी है कि यदि देशों ने इस अमेरिकी दावे का समर्थन नहीं किया, तो उन पर टैरिफ लगाया जाएगा.
यूरोप की प्रतिक्रिया
ट्रंप की ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग को लेकर यूरोपीय देशों ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है. डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों ने मिलकर यह स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण नहीं हो सकता. यूरोपीय नेताओं का कहना है कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रंप का रुख अस्वीकार्य है, और यह यूरोपीय संघ के सिद्धांतों के खिलाफ है. डेनमार्क ने पहले भी ट्रंप के ग्रीनलैंड खरीदने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और कहा था, "ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है."
ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व
अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व बेहद महत्वपूर्ण है. वहां स्थित थुले एयर बेस आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की निगरानी और रक्षा प्रणाली का एक अहम हिस्सा है. इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री मार्ग और प्राकृतिक संसाधन उभर रहे हैं, जो ग्रीनलैंड की भू-राजनीतिक अहमियत को और बढ़ा रहे हैं. ऐसे में ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए खतरे का कारण बन सकता है.
ट्रंप की नई धमकी
ट्रंप का यह बयान अमेरिकी "अमेरिका फर्स्ट" नीति के अनुरूप है, जो उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत को मजबूती दे रहा है. ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर यह नई धमकी वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकती है. डेनमार्क और यूरोपीय संघ पहले ही ट्रंप की व्यापार नीतियों से असहमत हैं, और इस धमकी के बाद वैश्विक आर्थिक रिश्तों में और तनाव बढ़ सकता है. ट्रंप के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अमेरिकी हितों को पूरी तरह से प्राथमिकता देंगे, चाहे इसके लिए उन्हें दुनिया के अन्य देशों से टकराना ही क्यों न पड़े.
अमेरिका का बड़ा खेल
ट्रंप का ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का सपना उनके पहले कार्यकाल के दौरान ही उभरा था, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसे खरीदने की इच्छा जताई थी. हालांकि, डेनमार्क ने इसे "अजीब" और "अनुचित" करार दिया था. अब फिर से इस मुद्दे को तूल देते हुए ट्रंप ने अपने कड़े रुख को दिखाया है. यह सवाल अब उठता है कि क्या ट्रंप की यह धमकी सिर्फ एक राजनीतिक रणनीति है या वे वाकई ग्रीनलैंड पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए कड़ा कदम उठाने के इरादे में हैं.
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