जुकरबर्ग को जेल की धमकी, मस्‍क को कह चुके पागल... इन कंपनियों के CEO को न‍िशाने पर ले चुके हैं ट्रंप

आज की दुनिया में जहां टेक्नोलॉजी कंपनियों का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है, वहीं राजनीति और टेक वर्ल्ड के टकराव की कहानियां भी जोर पकड़ रही हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस टकराव के सबसे मुखर और विवादास्पद किरदार बनकर उभरे हैं.

Trump has targeted the CEOs of these companies
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

आज की दुनिया में जहां टेक्नोलॉजी कंपनियों का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है, वहीं राजनीति और टेक वर्ल्ड के टकराव की कहानियां भी जोर पकड़ रही हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस टकराव के सबसे मुखर और विवादास्पद किरदार बनकर उभरे हैं. ट्रंप ने सिर्फ अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर ही हमला नहीं बोला, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों के CEO पर भी तीखे शब्दों से निशाना साधा. उनकी जुबान से निकले तीखे तंज और धमकियों ने बार-बार चर्चा को जन्म दिया है, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या यह सत्ता की ताकत का इस्तेमाल था या महज राजनीतिक स्टाइल?

ट्रंप ने हाल ही में इंटेल के CEO लिपु-बू टैन से इस्तीफे की मांग करते हुए एक बार फिर दिखा दिया कि जब बात कॉर्पोरेट की आती है, तो वे पीछे हटने वालों में नहीं हैं. उन्होंने टैन पर चीन से संबंध रखने का आरोप लगाया और कहा कि अब उन्हें अपने पद से हट जाना चाहिए. यह बयान एक सामान्य आलोचना नहीं, बल्कि सार्वजनिक मंच से दी गई चेतावनी थी. और यह पहली बार नहीं था.

ट्रंप का सोशल मीडिया हथियार

डोनाल्ड ट्रंप के पास शब्दों की कमी नहीं है और उन्हें मंच की भी जरूरत नहीं, क्योंकि उनके पास अपना खुद का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social है. यही वो जगह है जहां से उन्होंने कई बार नामचीन कंपनियों के प्रमुखों पर तीखे हमले किए. ट्रंप अकसर इन पोस्ट्स के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं, और इन पोस्ट्स में सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि रणनीति और दबाव की झलक भी दिखाई देती है.

इंटेल के CEO को "कॉन्फ्लेटेड" कहकर ट्रंप ने सीधा हमला बोला और यह कहकर कि “इस समस्या का कोई और समाधान नहीं है”, उन्होंने साफ कर दिया कि वे किसी सॉफ्ट अप्रोच के पक्षधर नहीं हैं. यही स्टाइल उन्होंने पहले एलन मस्क, सुंदर पिचाई, टिम कुक, मार्क जुकरबर्ग और डग मैकमिलन (वॉलमार्ट) जैसे बड़े नामों पर भी अपनाई.

एलन मस्क: दोस्त से बने दुश्मन

कभी ट्रंप की नीतियों के समर्थक रहे एलन मस्क, जिन्होंने ट्रंप के चुनावी अभियान में बड़ा आर्थिक सहयोग भी दिया था, आज ट्रंप की आलोचना का प्रमुख चेहरा बन गए हैं. ट्रंप और मस्क के बीच बढ़ती दूरी ने उस समय नया मोड़ लिया जब ट्रंप ने मस्क को सार्वजनिक रूप से "पागल" कह डाला.

उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर मस्क की कंपनियों को सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी और कॉन्ट्रैक्ट्स की समीक्षा नहीं हुई, तो यह ट्रंप प्रशासन की बड़ी चूक होगी. उन्होंने अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) से अपील की कि मस्क की कंपनियों के साथ की जा रही डील्स पर कड़ी नजर रखी जाए.

यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत हमले नहीं थे, बल्कि यह दिखाते हैं कि ट्रंप टेक्नोलॉजी के बड़े खिलाड़ियों पर भी वैसी ही सख्ती से बात करते हैं जैसे किसी राजनीतिक विरोधी पर करते हैं.

सुंदर पिचाई और गूगल को नहीं छोड़ा

गूगल के सर्च रिजल्ट्स को लेकर ट्रंप की नाराजगी कोई नई बात नहीं है. ब्लूमबर्ग के साथ बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि गूगल का एल्गोरिदम राजनीतिक रूप से पक्षपाती है. उन्होंने दावा किया कि गूगल जानबूझकर उनके खिलाफ नेगेटिव खबरों को ऊपर दिखाता है, जबकि पॉजिटिव कंटेंट को पीछे धकेल देता है.

इतना ही नहीं, ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से गूगल के CEO सुंदर पिचाई से बात करके अपनी नाराजगी जताई थी. उन्होंने यह भी कहा कि वह गूगल के "फैन" नहीं हैं और उनका मानना है कि गूगल उनके साथ "बुरा व्यवहार" करता है.

यह एक राष्ट्रपति के स्तर से आए ऐसे आरोप थे जो न केवल गूगल की साख पर सवाल उठाते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि ट्रंप टेक्नोलॉजी को एक निष्पक्ष मंच नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मोर्चा मानते हैं.

जुकरबर्ग को दिए थे जेल की धमकी

फेसबुक (अब मेटा) के CEO मार्क जुकरबर्ग पर ट्रंप की भड़ास और भी तीखी रही. ट्रंप ने दावा किया कि जुकरबर्ग ने निजी तौर पर उन्हें यह कहा था कि फेसबुक पर ट्रंप जैसा कोई नहीं है, लेकिन फिर भी उन्होंने उनके खिलाफ काम किया.

उन्होंने यह तक कह दिया कि “अगर जुकरबर्ग ने इस बार कुछ भी अवैध किया, तो वह अपनी पूरी जिंदगी जेल में गुज़ारेगा.” यह धमकी महज बयान नहीं था, बल्कि वह चेतावनी थी जो साफ इशारा करती है कि ट्रंप किसी भी टेक CEO को कानून के नाम पर घेरने से पीछे नहीं हटेंगे.

टिम कुक और Apple पर ट्रेड वॉर का दबाव

Apple के CEO टिम कुक को लेकर ट्रंप की आपत्ति है कि वे अमेरिका में बिकने वाले iPhones का निर्माण अमेरिका में नहीं, बल्कि भारत या अन्य देशों में कर रहे हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह खुलासा किया कि उन्होंने टिम कुक से सीधे बात की थी और स्पष्ट शब्दों में कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि Apple अपने प्रोडक्ट "Made in USA" बनाएगा.

इसके साथ ही ट्रंप ने धमकी दी कि अगर Apple अपने प्रोडक्ट को विदेशों में बनाता रहा, तो उन पर 25% टैरिफ लगाया जा सकता है. यह बयान सिर्फ एक सुझाव नहीं था, यह एक साफ संदेश था कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए टेक कंपनियों पर आर्थिक दबाव बनाने को भी तैयार है.

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