130 दिन में अपने 11 फैसले पलट चुके हैं ट्रंप, कोर्ट ने 180 आदेश रोके, 250 से ज्यादा याचिका दायर​​​​​​​

डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल अभी 130 दिन ही पुराना है, लेकिन इस अल्प समय में ही उनके प्रशासन की नीतियों पर कानूनी अड़चनें, विरोध और यू-टर्न की बाढ़ आ चुकी है.

Trump has reversed 11 of his decisions in 130 days
डोनाल्ड ट्रम्प/Photo- ANI

वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल अभी 130 दिन ही पुराना है, लेकिन इस अल्प समय में ही उनके प्रशासन की नीतियों पर कानूनी अड़चनें, विरोध और यू-टर्न की बाढ़ आ चुकी है.

जहां एक ओर ट्रंप प्रशासन पर 250 से अधिक कानूनी याचिकाएं दर्ज हो चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर अदालतें अब तक 180 बार उनकी नीतियों या कार्यकारी आदेशों पर अस्थायी या स्थायी रोक लगा चुकी हैं. खुद ट्रंप भी 11 प्रमुख फैसलों से पीछे हट चुके हैं, यह बताने के लिए काफी है कि प्रशासनिक स्थिरता कितनी डगमगाई हुई है.

कोर्ट में असंवैधानिक ठहरे ट्रंप के आदेश

अमेरिकी अदालतों ने हाल के महीनों में कई ऐसे अहम फैसलों पर हस्तक्षेप किया है जिन्हें प्रशासन ने लागू करने की कोशिश की. उदाहरण के तौर पर, कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने और संघीय कर्मचारियों की सामूहिक छंटनी जैसे आदेशों को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया.

इसके साथ ही, विदेशी सहायता रोकने, पर्यावरण नियमों को शिथिल करने, और गैर-अमेरिकियों के वोटिंग अधिकारों पर रोक जैसे कदमों को अदालतों ने कानूनी कसौटी पर अस्वीकार कर दिया है. अप्रैल 2025 में सिर्फ एक हफ्ते में ट्रंप प्रशासन को 11 मुकदमों में शिकस्त झेलनी पड़ी.

ट्रंप के फैसले जो बदलने पड़े

ट्रंप को टैरिफ नीतियों, बर्थ राइट रोकने, फेडरल फंडिंग फ्रीज, और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा जैसे मामलों में पीछे हटना पड़ा. कुछ फैसले उन्होंने खुद वापस लिए, तो कुछ कोर्ट के आदेशों के चलते रोकने पड़े.

इबोला फंडिंग को रद्द करने का फैसला हो या मेक्सिको-कनाडा व्यापार समझौता रद्द करने की घोषणा, दोनों मामलों में जबरदस्त विरोध और दबाव के कारण उन्हें अपने कदम पीछे लेने पड़े.

मस्क और ट्रंप में बढ़ती दूरी

एक वक्त ट्रंप के समर्थक रहे इलॉन मस्क ने अब उनसे दूरी बना ली है. इसकी सबसे बड़ी वजह मस्क का चीन में गहराता कारोबारी जुड़ाव है. टेस्ला की बैटरियों का 40% और कलपुर्जों का 25% हिस्सा चीन से आता है, और शंघाई में टेस्ला की दो गीगाफैक्ट्रियां चल रही हैं.

मार्च 2025 में पेंटागन की एक गोपनीय मीटिंग में मस्क ने अमेरिका की चीन रणनीति से जुड़े संवेदनशील डेटा की मांग की थी, जिसे ट्रंप ने स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया. इसी के बाद से दोनों के रिश्तों में खटास आ गई.

टेस्ला, जो चीन में डेटा शेयर करती है, ट्रंप प्रशासन की नजर में अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी है. ट्रंप द्वारा चीन पर लगाए गए भारी टैरिफ के चलते टेस्ला को अप्रैल तक 71% तक मुनाफे का नुकसान हुआ है.

क्या ट्रंप प्रशासन टिक पाएगा?

लगातार फैसले पलटना, कोर्ट में हार, और बड़े कारोबारियों से टकराव, ट्रंप के इस कार्यकाल की शुरुआती तस्वीर नीतिगत भ्रम और प्रशासनिक अस्थिरता से भरी नजर आ रही है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या ट्रंप इन चुनौतियों से उबर पाते हैं या यह कार्यकाल भी टकराव और पीछे हटने की कहानी बन कर रह जाएगा.

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