US-Iran Conflict: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और यह स्थिति अब पांच दिनों से ज्यादा समय से चल रही है. इस दौरान हमलों में कोई कमी नहीं आई, बल्कि हमले लगातार तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं.
इसी बीच अमेरिकी सीनेट में युद्ध सीमित करने के लिए लाए गए “वॉर पावर्स रेजोल्यूशन” को मंजूरी नहीं मिल सकी. इस प्रस्ताव का उद्देश्य राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई की शक्ति पर नियंत्रण रखना और किसी भी बड़े हमले से पहले कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य करना था.
वार पावर्स रेजोल्यूशन, उद्देश्य और स्थिति
इस प्रस्ताव के तहत कोशिश की गई थी कि अगर कोई सैन्य कार्रवाई की जाए, खासकर ईरान पर हमला किया जाए, तो राष्ट्रपति को सीधे कार्रवाई शुरू करने से पहले कांग्रेस की अनुमति लेनी पड़े. यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य फैसलों पर नियंत्रण लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा था. हालांकि, बिल को मंजूरी नहीं मिल पाई, जिसे ट्रंप की जीत माना जा रहा है.
सीनेट में वोटिंग के दौरान यह प्रस्ताव 47 के मुकाबले 53 वोटों से नामंजूर कर दिया गया. मतदान में ज्यादातर पार्टी लाइन के अनुसार वोटिंग हुई. रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इसके खिलाफ वोट किया.
राजनीतिक बयान और प्रतिक्रियाएं
डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि यह वोट तय करेगा कि सीनेटर अमेरिकी जनता के साथ हैं जो मिडिल ईस्ट के लगातार युद्धों से थक चुकी है, या राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ हैं. वहीं, रिपब्लिकन नेता जॉन बरासो ने इसे राष्ट्रपति को रोकने की कोशिश बताया और कहा कि असली मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है.
सैन्य स्थिति और हमले
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर एक बड़ा हमला किया था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और नेता मारे गए. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस का समर्थन जुटाने की कोशिश तेज कर दी थी. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यह युद्ध आठ हफ्तों तक चल सकता है, जो पहले बताए गए समय से लंबा है.
ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने हाल ही में बताया कि अमेरिकी सैनिक अभी भी खतरे में हैं और जोखिम कम नहीं हुआ है. इसी हफ्ते कुवैत में हुए ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई. यह संकेत देता है कि इस संघर्ष का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं है बल्कि अमेरिकी और गठबंधन बलों के लिए भी गंभीर खतरे पैदा कर रहा है.
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