नई दिल्ली: भारत सरकार ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर संवेदना व्यक्त की है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरान के दूतावास जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और खामेनेई के प्रति दुख व्यक्त किया. भारत की यह संवेदना ऐसे समय में आई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है.
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हमले में हुई मौत
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में हुई. 86 वर्षीय खामेनेई ने 1989 से ईरान पर शासन किया था. उनके निधन के बाद अब उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई को देश के अगले शीर्ष नेता के रूप में देखा जा रहा है.
ईरान का अमेरिका और इजरायल पर जवाबी हमला
खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने तुरंत बदले की कार्रवाई की. इस दौरान इजरायल और पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की ओर धकेल दिया है और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता पैदा कर दी है.
हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी हमला
वहीं, बुधवार को अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत "आईरिस देना" को टारपीडो से मार गिराया. यह युद्धपोत इंडियन नेवी के बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास मिलान 2026 से लौट रहा था. इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षा और तनाव की नई बहस को जन्म दिया है.
#WATCH | Foreign Secretary Vikram Misri, on behalf of Government of India, signed the Condolence Book at the Embassy of Iran in New Delhi today, and offered condolences to the slain Supreme Leader of Iran Ayatollah Ali Khamenei. pic.twitter.com/A3IP2d0diX
— ANI (@ANI) March 5, 2026
अजरबैजान-ईरान तनाव और ड्रोन हमले
इसी बीच, अजरबैजान ने आरोप लगाया कि ईरानी ड्रोन ने उसके एयरपोर्ट को निशाना बनाकर हमला किया है. अजरबैजान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है. यह क्षेत्रीय तनाव और व्यापक युद्ध की आशंकाओं को और बढ़ा रहा है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी नौसेना पर "समुद्र में अत्याचार" का आरोप लगाया. इस हमले में कम से कम 87 ईरानी मारे गए. अराघची ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि अमेरिका को अपने इस कदम पर "बुरी तरह पछताना" पड़ेगा.
जंग अभी भी जारी
बृहस्पतिवार सुबह ईरान ने इजराइल और अमेरिका के कई ठिकानों पर नए सिरे से हमले किए. ईरान के सरकारी टीवी के मुताबिक अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि इजराइली सेना ने लेबनान में हिजबुल्ला से जुड़े 80 ठिकानों पर हमले का दावा किया. बैलिस्टिक मिसाइल लांच स्थल समेत अन्य रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया.
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