भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्तों में आई तल्खी अब खुलकर सामने आने लगी है. हाल के घटनाक्रमों से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर भारी टैरिफ लगाने के बाद अब अपनी बहुप्रतीक्षित भारत यात्रा रद्द कर दी है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अब साल के अंत में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत नहीं आएंगे.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने शनिवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ने भारत दौरे को फिलहाल स्थगित कर दिया है. पहले ऐसा माना जा रहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आएंगे, लेकिन अब उन्होंने यह योजना बदल दी है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ट्रंप ने पहले खुद प्रधानमंत्री मोदी को इस यात्रा के बारे में जानकारी दी थी, मगर बाद में उन्होंने इसे रद्द करने का फैसला कर लिया.
कूटनीतिक संबंधों में खटास की वजहें
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मतभेद लंबे समय से तनाव का कारण बने हुए हैं. हालिया घटनाएं, जैसे कि भारत पर 25% से 50% तक के टैरिफ लगाना, इस तनाव को और गहरा करती हैं. कहा जा रहा है कि अमेरिका ने यह टैरिफ इसलिए लगाया क्योंकि भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी, जबकि अमेरिका चाहता था कि भारत इस पर रोक लगाए.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का यह कदम नीतिगत से ज्यादा दंडात्मक प्रतीत होता है. जानकारों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में रूस पर दबाव बनाना चाहता, तो वह उन कानूनों को लागू करता जिनमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है. केवल भारत को टारगेट करना दर्शाता है कि असली कारण कुछ और हैं.
मोदी-ट्रंप संवाद में दूरी
17 जून को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच करीब 35 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी. यह कॉल उस समय हुई जब ट्रंप कनाडा में जी-7 सम्मेलन से लौट रहे थे. हालांकि, इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात नहीं हो सकी. फोन कॉल में भी दोनों के बीच तल्खी साफ झलकती रही.
विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, इस बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका का भारत-पाकिस्तान संघर्ष में कोई मध्यस्थता नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि सीजफायर की प्रक्रिया भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच मौजूद चैनलों के जरिए पूरी हुई, जिसकी पहल पाकिस्तान की ओर से की गई थी.
ट्रंप की नोबेल महत्वाकांक्षा और भारत का विरोध
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में एक दिलचस्प दावा यह भी किया गया है कि ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह कहा कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने जा रहा है और उन्होंने संकेत दिया कि मोदी को भी उनका समर्थन करना चाहिए. लेकिन मोदी ने इस बात का साफ खंडन कर दिया और अमेरिका की किसी भी भूमिका से इनकार किया.
मोदी का यह रवैया ट्रंप को रास नहीं आया और यह माना जा रहा है कि यही वह मोड़ था जहां दोनों नेताओं के संबंधों में दरार गहरी हो गई. रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने इस कॉल की कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं की और ट्रंप ने भी इसे सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया.
भारत की अनदेखी से नाराज ट्रंप?
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ट्रंप ने भारत से संपर्क करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. ऐसा माना जा रहा है कि मोदी की इस 'चुप्पी' ने ट्रंप को और अधिक नाराज कर दिया, जिसकी परिणति उनकी भारत यात्रा रद्द करने के रूप में सामने आई.
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