अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक रिश्तों को स्थिर करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते का ढांचा तैयार हो गया है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों ने चीनी आयात पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने से बचने के लिए एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर सहमति बना ली है.
इस समझौते के अनुसार, अमेरिका अब चीन पर पहले प्रस्तावित 100% अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाएगा. इसके बदले, चीन फिर से अमेरिकी सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों की खरीद शुरू करेगा. यह कदम अमेरिकी कृषि क्षेत्र और चीन के व्यापारिक बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले वर्षों में टैरिफ युद्ध के कारण दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार में भारी कमी आई थी.
आमने-सामने मिलेंगे ट्रंप-जिनपिंग
यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित आगामी बैठक से पहले लिया गया है. दोनों नेता इस हफ्ते साउथ कोरिया में आमने-सामने मिलेंगे, और इस फ्रेमवर्क पर विस्तृत चर्चा करेंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल एशियाई देशों के दौरे पर हैं. उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत मलेशिया से की, जहां वे आसियान समिट में शामिल हुए और थाईलैंड व कंबोडिया के बीच हुए शांति समझौते के समारोह में उपस्थित रहे. इसके बाद ट्रंप जापान की यात्रा पर रवाना हो गए हैं.
चीन का दुर्लभ खनिज नियंत्रण
दूसरी ओर, चीन ने हाल ही में अपने रेयर अर्थ मटेरियल्स (Rare Earth Materials) पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है. दुनिया में चीन के पास कुल 17 प्रकार के दुर्लभ खनिज हैं, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), और रक्षा उद्योग में किया जाता है.
चीन ने पहले से ही 7 खनिजों पर एक्सपोर्ट नियंत्रण लागू किया हुआ था, लेकिन 9 अक्टूबर को इसमें 5 और खनिज शामिल किए गए हैं: होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, यूरोपियम और यटरबियम. इसका मतलब है कि चीन अब कुल 12 में से 17 दुर्लभ खनिजों पर पूरी तरह नियंत्रण रखता है. इन खनिजों को निर्यात करने के लिए अब चीन से एक्सपोर्ट लाइसेंस लेना अनिवार्य है.
इस कदम का वैश्विक उद्योग और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि चीन दुनिया की 70% दुर्लभ खनिज आपूर्ति और 90% प्रोसेसिंग क्षमता नियंत्रित करता है. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए यह उद्योग और तकनीकी उत्पादन में चुनौती पैदा कर सकता है.
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