World War की आहट! ट्रंप ने रूस की ओर भेजे दो न्यूक्लियर सबमरीन, जानें कितनी तबाही मचा सकती हैं ये पनडुब्बियां

    American Nuclear submarines: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान और फैसलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं. हाल ही में उन्होंने रूस के नजदीक दो परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती का आदेश देने का दावा किया है.

    The sound of World War Trump sent two nuclear submarines towards Russia
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    American Nuclear submarines: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान और फैसलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं. हाल ही में उन्होंने रूस के नजदीक दो परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती का आदेश देने का दावा किया है. ट्रंप के मुताबिक, यह कदम रूस के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा सुरक्षा परिषद उपप्रमुख दिमित्री मेदवेदेव की आक्रामक टिप्पणियों के बाद उठाया गया है/

    मेदवेदेव ने हाल ही में ट्रंप की रूस पर ‘10 दिन में युद्ध खत्म करने’ वाली चेतावनी का उपहास उड़ाते हुए कहा कि ट्रंप रूस को इज़राइल या ईरान की तरह न समझें. उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर नया अल्टीमेटम युद्ध की ओर एक और क़दम है, और यह सिर्फ रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है.

    ट्रंप ने इसके जवाब में मीडिया को बताया कि उन्होंने “दो न्यूक्लियर सबमरीन को एक्टिवेट करने” का आदेश दिया है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि तैनात की गई पनडुब्बियां किस श्रेणी की हैं या वे वास्तव में कहां तैनात की गई हैं.

    ‘गैर-जिम्मेदाराना बयानबाज़ी’

    सुरक्षा विशेषज्ञ और परमाणु नियंत्रण पर काम करने वाले संगठनों ने ट्रंप के इस बयान को "बेहद लापरवाह और खतरनाक" करार दिया है. आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डेरिल किमबॉल ने कहा कि किसी भी राष्ट्राध्यक्ष को इस तरह की धमकियां सोशल मीडिया पर नहीं देनी चाहिए, खासकर जब बात परमाणु युद्ध जैसी संवेदनशील चीज़ की हो.

    अमेरिका की परमाणु पनडुब्बियों की ताकत

    हालांकि, ट्रंप ने जिस तरह से 'परमाणु पनडुब्बी' शब्द का प्रयोग किया है, वह अस्पष्ट है. लेकिन रक्षा आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका के पास 14 ओहायो-क्लास की बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBNs) हैं. इनमें से हर एक पनडुब्बी 24 ट्राइडेंट-II D5 मिसाइलों से लैस होती है. इन मिसाइलों की रेंज लगभग 7,400 किमी है और इनमें MIRV टेक्नोलॉजी (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicles) का उपयोग होता है, जिससे एक मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है. इनमें लगे थर्मोन्यूक्लियर वारहेड्स की ताकत 100 से 475 किलोटन तक होती है, तुलना करें तो हिरोशिमा पर गिराए गए बम की शक्ति सिर्फ 15 किलोटन थी.

    पेंटागन की चुप्पी

    इस घटनाक्रम के बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग और नौसेना ने ट्रंप के दावे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तैनाती और उनकी जानकारी बेहद गोपनीय होती है और इस पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से सही नहीं माना जाता.

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