पाकिस्तान में छिपे हाफिज सईद पर शिकंजा कसेगा भारत, लाहौर भेजा जाएगा NIA का समन, जानें एक्शन प्लान

लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ भारत ने कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है. साल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अब उसके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट के बाद अगला कदम उठा रही है.

The NIA will send a summons to Hafiz Saeed through diplomatic channels
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ भारत ने कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है. साल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अब उसके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट के बाद अगला कदम उठा रही है. एनआईए अदालत का समन कूटनीतिक माध्यम से लाहौर में सईद तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह समन विदेश मंत्रालय के जरिए पाकिस्तान भेजा जाएगा.

एनआईए ने जुलाई 2026 में दाखिल पूरक आरोपपत्र में हाफिज सईद को पहलगाम हमले की साजिश से जोड़ा है. एजेंसी ने उसे व्यक्तिगत तौर पर लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) से जुड़े प्रमुख आरोपी के तौर पर नामित किया है. उस पर भारत के खिलाफ साजिश रचने और युद्ध छेड़ने में भूमिका निभाने के आरोप लगाए गए हैं. इसके बाद जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने जुलाई में उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था.

लाहौर में समन पहुंचाने की तैयारी

अब अदालत के समन को पाकिस्तान के लाहौर में तामील कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हाफिज सईद को भारतीय अदालत के सामने पेश होने का आधिकारिक मौका दिया जाए.

अगर समन मिलने के बाद भी वह अदालत में पेश नहीं होता है और जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो भारत उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई कर सकता है.

गैरमौजूदगी में चल सकता है मुकदमा

भारत ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, जहां आरोपी विदेश में है और उसकी गिरफ्तारी या भारत प्रत्यर्पण संभव नहीं हो पा रहा है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 356 के तहत कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद आरोपी की गैरमौजूदगी में भी कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है.

इसी वजह से भारत पहले यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हाफिज सईद को अदालत के सामने अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया था. लाहौर में समन पहुंचाने की कोशिश इसी प्रक्रिया का हिस्सा है.

पाकिस्तान पर बढ़ सकता है दबाव

हाफिज सईद के खिलाफ पहलगाम हमले के मामले में कानूनी रिकॉर्ड मजबूत करने से पाकिस्तान पर भी दबाव बढ़ सकता है. भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जाती.

इस मामले को आतंकवाद और आतंकी फंडिंग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया जा सकता है. वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि हाफिज सईद आतंकी फंडिंग से जुड़े मामलों में सजा के बाद हिरासत में है. इसके बावजूद भारतीय एजेंसियां उसे पहलगाम हमले समेत कई आतंकी साजिशों से जोड़ती रही हैं.

भारत का आगे का प्लान

भारत की कोशिश है कि हाफिज सईद के खिलाफ मामले में हर जरूरी कानूनी कदम आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हो. समन की तामील से लेकर आगे की कार्रवाई तक सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी.

अगर हाफिज सईद अदालत में पेश नहीं होता है, तो जरूरी कानूनी शर्तें पूरी होने के बाद उसकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है.

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