इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना तब तक तैनात रहेगी, जब तक देश की सुरक्षा के लिए इसकी जरूरत होगी. उन्होंने साफ किया कि इजराइल अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा.
यरुशलम में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर साधा निशाना
नेतन्याहू ने दावा किया कि इजराइल ने अपने सैन्य अभियानों के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. उनके अनुसार, अगर ये अभियान नहीं चलाए गए होते तो ईरान परमाणु हथियार बनाने के काफी करीब पहुंच सकता था.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सहयोग से ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान पहुंचा और उसकी परमाणु क्षमता कमजोर हुई है.
अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर
स्विट्जरलैंड में चल रही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का जिक्र करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि चाहे वार्ता का कोई भी नतीजा निकले, इजराइल की नीति नहीं बदलेगी.
उन्होंने कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, तब तक ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
दक्षिणी लेबनान में क्यों तैनात है सेना?
नेतन्याहू के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में सेना की मौजूदगी सिर्फ सुरक्षा कारणों से है. उनका कहना है कि सीमा के पास रहने वाले इजराइली नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपने लोगों की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकता.
हिजबुल्लाह को बताया असली दुश्मन
नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल की लड़ाई लेबनान से नहीं, बल्कि हिजबुल्लाह से है. उनके अनुसार, हिजबुल्लाह न सिर्फ इजराइल के लिए खतरा है बल्कि लेबनान को भी नुकसान पहुंचा रहा है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर हिजबुल्लाह कमजोर पड़ता है या हथियार छोड़ने पर मजबूर होता है, तो भविष्य में इजराइल और लेबनान के बीच शांति समझौते की संभावना बन सकती है.
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