पानी के लिए फिर बिलबिलाया पाकिस्तान! ख्वाजा आसिफ ने भारत को दी जंग की गीदड़भभकी, जानें क्या कहा

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर देश की पानी सुरक्षा को खतरा हुआ तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा.

Pakistan Khawaja Asif threatens India with war over india stops indus water treaty
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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर देश की पानी सुरक्षा को खतरा हुआ तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के कई हिस्सों में गंभीर जल संकट देखने को मिल रहा है.

एक टीवी इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को यह महसूस हुआ कि भारत उसकी पानी सप्लाई को प्रभावित कर रहा है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बन जाएगा. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान युद्ध का रास्ता भी अपना सकता है.

सिंधु जल संधि को लेकर बढ़ा तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव पहले से ही बना हुआ है. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था. इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी.

भारत का कहना था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक यह फैसला जारी रहेगा. 1960 में हुई इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली के अधिकांश पानी का उपयोग पाकिस्तान करता है और उसकी खेती काफी हद तक इसी पर निर्भर है.

भारत पर लगाए आरोप

ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया कि भारत पानी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि भारत चिनाब नदी के पानी के प्रवाह में बदलाव कर सकता है और जरूरी जल संबंधी जानकारी भी साझा नहीं कर रहा है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले पाकिस्तान की टीमें भारतीय परियोजनाओं का निरीक्षण करती थीं, लेकिन हाल के घटनाक्रमों की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है.

पाकिस्तान में गहराता जल संकट

इस समय पाकिस्तान के कई इलाकों, खासकर सिंध और बलूचिस्तान में पानी की भारी कमी है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार कई प्रमुख नहरों में पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे खेती और रोजमर्रा की जरूरतों पर असर पड़ रहा है.

सिंध के अधिकारियों ने पंजाब प्रांत पर तय सीमा से ज्यादा पानी लेने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि इससे नीचे के इलाकों में पानी की उपलब्धता और कम हो गई है.

आर्थिक संकट की चेतावनी

पानी की कमी को लेकर स्थानीय नेताओं और विशेषज्ञों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कृषि, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है. साथ ही विभिन्न प्रांतों के बीच पानी को लेकर विवाद भी बढ़ने की आशंका है.

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